अभिनेता राजकपूर की जीवनी | Raj Kapoor Biography in Hindi

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Raj Kapoor Biography in Hindi
Raj Kapoor Biography in Hindi

राजकपुर (Raj Kapoor) पाकिस्तान के पेशावर नामक नगर में पैदा हुए | उनके पिता का नाम पृथ्वीराज कपूर था जो एक प्रसिद्ध अभिनेता थे | राजकपूर की माँ का नाम रामसरनी देवी था | शम्मी कपूर और शशि कपूर दोनों छोटे भाई भी फिल्मो में करियर बना चुके थे | कुछ समय वे रावलपिंडी में पढ़े फिर 1930 में वे देहरादून के कैम्ब्रिज स्कूल में दाखिल हुए | 11 वर्ष की उम्र में इन्कलाब फिल्म से शुरू हुयी उनकी अभिनय यात्रा के विभिन्न पड़ाव रहे |

राजकपूर (Raj Kapoor) अभिनेता , निर्माता और निर्देशक के रूप में अनेक फिल्मो से जुड़े रहे | समाजवाद से प्रेरित फिल्मो से लेकर प्रेमकथाये अपने मादक अंदाज में प्रस्तुत कर लोकप्रियता अर्जित की | उनको अपने समय का शोमेन कहा जाता है | सोवियत संघ तथा मध्य पूर्व में राजकपूर की लोकप्रियता दंतकथा बन चुकी थी | 1947 में मधुबाला के साथ नीलकमल फिल्म में नायक के रूप में कार्य करके प्रभावित किया | 1948 में आर.के. फिल्म स्टूडियो की स्थापना की तथा अत्यंत युवा निर्देशक बने |

नर्गिस के साथ आग और कामिनी कौशल के साथ अंदाज में काम किया | बहुत ही फिल्मे बॉक्स ऑफिस पर सफल रही जिसमे प्रमुख है बरसात , जागते रहो , आवारा , जिस देश में गंगा बहती है , श्री 420 , चोरी चोरी , अनाडी , छलिया , तीसरी कसम है | संगम उनकी प्रथम रंगीन फिल्म थी जिसमे वैजयन्ती माला के साथ अभिनय किया | 1970 में आयी मेरा नाम जोकर उनका ड्रीम प्रोजेक्ट था पर फिल्म चली नही | बेटे ऋषि कपूर और डिम्पल कपाडिया को लेकर 1973 में बॉबी बनाई जो हिट रही |

सत्यम शिवम सुन्दरम और राम तेरी गंगा मैली फिल्मे भी सफल रही | हीना फिल्म के निर्माण के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गयी जिस फिल्म को रणधीर कपूर ने पूरा किया | उन्हें सिने प्रेमी दर्शको से तथा फिल्म आलोचकों दोनों से भरपूर प्रशंशा मिली | वे स्वयं चार्ली चैपलिन के प्रशंशक थे उनके अभिनय में “चार्ली चैपलिन” की झलक दिखाई देती है | उन्हें भारतीय सिनेमा का चार्ली चैपलिन कहा जाता है | उनकी फिल्मो को सोविय रूस , चीन , अफ्रीका आदि देशो में बहुत प्रसिधी मिली  |

रूस में तो उनकी फिल्मो के गाने भी अत्यंत लोकप्रिय रहे | विशेषकर फिल्म आवारा और श्री 420 के | “मेरा जूता है जापानी ” तो लोगो की जुबान पर चढ़ गया था | संगीत की बेहद समझ थी उन्हें | शंकर जयकिशन संगीतकार के रूप में 18 वर्षो तक उनके साथ काम करते रहे | गीतकार शैलेन्द्र एवं हसरत जयपुरी तथा गायक मुकेश भी इस टीम में शामिल थे | उनकी प्रतिभा के कारण बहुत प्रसिधी तो मिली ही बहुत से पुरुस्कार भी मिले | 2 जून 1988 को नई दिल्ली में राजकपूर (Raj Kapoor) का देहांत हो गया |

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