Raja Ravi Varma Biography in Hindi | महान चित्रकार राजा रवि वर्मा की जीवनी

Raja Ravi Varma Biography in Hindiराजा रवि वर्मा (Raja Ravi Varma) 19वी और 20वी सदी के ऐसे महान अग्रणी चित्रकार (Painter) थे जिन्होंने भारतीय चित्रकला को परम्परागत ढाँचे से बाहर लाकर आधुनिक शैली प्रदान की | प्राचीन भारतीय चित्रकला और आधुनिक नवीन चित्रकला की शैली का अद्भुद सम्मिश्रण उनकी चित्रकला में देखने को मिलता है | आइये उनकी जीवनी से आपको रूबरू करवाते है |

सन 1848 को राजा रवि वर्मा (Raja Ravi Varma) का जन्म केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से लगभग 36 किमी दूर किलिम्म्नुर गाँव (Kilimanoor) में हुआ था | कहा जाता है कि उनका परिवार त्रावनकोर के राज परिवार से जुड़ा हुआ था | उनके चाचा भी श्रेष्ट चित्रकार थे | राजा रवि वर्मा (Raja Ravi Varma) ने प्रारम्भिक चित्रकला त्रिवेन्द्रम के राजकीय चित्रकार रामास्वामी नायडू से सीखी और दरबारी चित्रकला अलाग्री नायडू से प्राप्त की | उनकी चित्रकला पर यूरोपीय चित्रकारी की छाप एवं झलक दिखाई पडती है |

वस्तुत: राजा रवि वर्मा (Raja Ravi Varma) ने भारतीय धर्म के सभी प्रमुख देवी देवताओं के चित्र अत्यंत कलात्मकता ,सुन्दरता ,मधुरता एवं सौष्ठव के साथ बनाये है | उनके अद्वितीय चित्रकला कौशल के अनुपम उदाहरण विश्वामित्र , मेनका के चित्र , हरीशचंद्र , श्रीकृष्ण ,बलराम ,मोहिनी ,रुकमागंधा तथा दुष्यंत-शकुंतला आदि है | जब 1893 में उनके चित्रों की प्रदर्शनी लगायी गयी थी तब उस चित्र प्रदर्शनी को देखने का का अधिकार केवल धनी मानी लोगो को ही था | बाद में चित्रकला जब जनसामान्य तक पहुची ,तब लोगो को उनकी अद्भुद चित्रकला से परिचित होने का अवसर मिला |

राजा रवि वर्मा (Raja Ravi Varma) भारत के चित्रकारों में अपना अद्वितीय स्थान इसलिए रखते है क्योंकि उनकी कला की तकनीकी प्राचीन और यूरोपीय कला शैली के बेजोड़ समन्वय की विशिष्टता लिए हुए है | भारतीय सामान्य जनमानस में वे इसलिए लोकप्रिय हुए क्योंकि उन्होंने हिन्दू देवी देवताओं के अत्यंत सुंदर एवं स्वाभाविक मुद्रा में ऐसे चित्र बनाए ,जो अत्यंत सजीव तथा श्रुधा से युक्त जान पड़ते है | उनकी चित्रकला में तेल चित्रों का सुंदर रूप मिलता है |

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