Rajkumari Amrit Kaur Biography in Hindi | राजकुमारी अमृत कौर की जीवनी

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Rajkumari Amrit Kaur Biography in Hindi
Rajkumari Amrit Kaur Biography in Hindi

राजकुमारी अमृत कौर (Rajkumari Amrit Kaur) उन नेताओं में से है जिनका संबध सम्पन्न राजघरानो से रहा लेकिन देश एवं नागरिको ,विशेषत: महिलाओ एवं बच्चो की दुर्दशा उन्हें राजनीति में ले आयी | राजकुमारी अमृत कौर (Rajkumari Amrit Kaur) का जन्म 2 फरवरी 1889 को लखनऊ में हुआ था | लखनऊ उस समय भी उत्तर प्रदेश की राजधानी थी जो तब संयुक्त प्रांत के नाम से जाना जाता था | राजकुमारी सात भाइयो की इकलौती बहन थी | उनके पिता राजा हरनाम सिंह पंजाब के कपूरथला राजघराने से ताल्लुक रखते थे और उनकी माता रानी हरनाम कौर का संबध बंगाली ईसाई परिवार से था |

राजकुमारी (Rajkumari Amrit Kaur) की प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा इंग्लैंड के शेरबोर्न गर्ल्स स्कूल में हुयी | वही ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की | उच्च शिक्षा पूर्ण कर वह भारत लौट आयी | उनके पिता राजा हरनाम सिंह की कांग्रेस के तत्कालीन नेताओं के साथ गहरी दोस्ती थी विशेषकर गोपाल कृष्ण गोखले के साथ | इन नेताओं का उनके घर नियमित रूप से आना जाना लगा रहता था | स्वदेश वापसी पर इन राष्ट्रीय नेताओं के सम्पर्क में आने पर राजकुमारी का गुलाम भारत की दुर्दशा से परिचय हुआ |

सन 1919 में बम्बई में महात्मा गांधी से भेंट होने के बाद तो उनके जीवन की दिशा ही बदल गयी | उनके विचारों एवं देश के प्रति उनकी दृष्टि का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा | उसी साल जलियांवाला बाग़ का नरसंहार भी हुआ | अंग्रेज सिपाहियों की गोलियों से हजारो निर्दोष नौजवान महिलाये एवं बच्चे मारे गये | उनके मन में यह बात गहराई से बैठ गयी कि देश की पूर्ण स्वतंत्रता के बगैर यहाँ के नागरिको का उत्थान सम्भव नही है | इन्ही सब भावनाओं से प्रेरित होकर वह कांग्रेस में शामिल हो गयी और स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढकर भाग लेने लगी |

राजकुमारी (Rajkumari Amrit Kaur) ने सन 1927 में अखिल भारतीय महिला सम्मेलन की स्थापना की | 1930 में इसकी सचिव बनी तथा 1930 में ही उन्होंने महात्मा गांधी के दांडी मार्च में भाग लिया | उनके इस अपराध के लिए अंग्रेजो ने उन्हें जेल में डाल दिया | सन 1934 में राजकुमारी गांधीजी के आश्रम में रहने लगी और सन्यासियों जैसा जीवन व्यतीत करने लगी | उन्होंने सोलह साल तक गांधीजी के सचिव के रूप में कार्य किया | 1937 में कांग्रेस ने अपने सद्भावना मिशन में उन्हें पश्चिमोत्तर प्रांत स्थित बन्नू भेजा जहां जातीय उन्माद फ़ैल रहा था परन्तु अंग्रेज अधिकारियों ने उन पर राजद्रोह का आरोप लगाकर उन्हें जेल भेज दिया लेकिन वे उनकी देशप्रेम की भावना का दमन नही कर सके |

सन 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन में उन्होंने बढ़ चढकर हिस्सा लिया , जिसके लिए उन्हें पुन: जेल में डाल दिया गया | स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ही राजकुमारी आम जनता को मताधिकार देने की पक्षधर थी | लोथियन समिति के समक्ष उन्होंने इस बारे में प्रतिनिधित्व भे किया था | ब्रिटिश संसद की जॉन सलेक्ट समिति के समक्ष भारतीय संवैधानिक सुधारो के बारे में भी प्रतिनिधित्व किया | यही नही उन्होंने महिला शिक्षा के क्षेत्र में भी अतुलनीय योगदान दिया | वह अखिल भारतीय महिला शिक्षा एसोसिएशन की अध्यक्ष रही |

लेडी इरविन महिला महाविद्यालय की कार्यकारी समिति की सदस्य भी थी | अंग्रेज सरकार ने उन्हें शिक्षा सलाहकार बोर्ड की सदस्य भी नियुक्त किया | भारत छोड़ो आन्दोलन में शामिल होने पर उन्होंने इस पद से त्याग पत्र दे दिया | सन 1945 एवं 1946 में क्रमश: लन्दन एवं पेरिस में यूनेस्को सम्मेलनों में भारत के प्रतिनिधि मंडल में भी वह शामिल थी | उन्होंने भारत में अशिक्षा ,बाल विवाह तथा महिलाओं में प्रचलित पर्दा प्रथा के उन्मूलन में भी भारी योगदान दिया |

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात राजकुमारी अमृत कौर (Rajkumari Amrit Kaur) जवाहरलाल नेहरु के प्रथम मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बनी | उन्हें स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया | 1950 में विश्व स्वास्थ्य संघठन की अध्यक्ष चुनी गयी | यह पद सम्भालने वाली भी वह पहली महिला थी और प्रथम एशियाई भी | स्वास्थ मंत्री रहते हुए उन्होंने भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए अथक प्रयास किये | नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान उन्ही के प्रयासों का फल है | इस संस्थान की स्थापना के लिए उन्होंने न्यूजीलैंड , ऑस्ट्रेलिया , पश्चिमी जर्मनी ,स्वीडन और अमेरिका से आर्थिक सहायता प्राप्त की | यही नही उन्होंने अपने भाइयो के साथ मिलकर हिमाचल प्रदेश के शिमला के निकट अपनी पुश्तैनी जायदाद एवं घर को दान कर दिया | इस घर में आयुर्विज्ञान संस्थान में डॉक्टरों एवं नर्सो के लिए अवकाश गृह बनाया गया |

देश सेवा के क्षेत्र में राजकुमारी अमृत कौर (Rajkumari Amrit Kaur) के योगदानो की सूची अंतहीन है | भारत के सुदूर ग्रामीण अंचलो में अच्छी चिकित्सा सेवाए पहुचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी | सन 1957 से 1964 तक वह राज्यसभा की सदस्य रही | 02 अक्टूबर 1964 को उनका निधन हो गया | अंतिम क्षण तक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान TB एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया और सेंत जॉन एम्बुलेंस कोर की अध्यक्ष थी | उनकी इन सेवाओं के लिए उन्हें रेने सैंड मेमोरियल अवार्ड से सम्मानित किया गया |

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