Ramanand Sagar Biography in Hindi | फिल्मकार और पत्रकार रामानंद सागर की जीवनी

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Ramanand Sagar Biography in Hindi
Ramanand Sagar Biography in Hindi

हिंदी सिनेमा की विकास यात्रा में अनेक ऐसे फिल्मकार सलंग्न रहे है जिन्होंने अपने करियर की शुरुवात लेखन और पत्रकारिता से की है | ख्वाजा अहमद अब्बास की ही तरह रामानन्द सागर (Ramanand Sagar) भी पहले पत्रकार थे | यद्यपि ख्वाजा अहमद अब्बास की भांति सक्रिय प्रतिबद्ध लेखक नही रहे परन्तु सामाजिक सौहार्द उनकी संवेदना का आधार रहा है | उनका मूल नाम रामानन्द शंकरदास चोपड़ा था और उनका जन्म 1917 में लाहौर में हुआ था | वह पत्रकार होने के साथ साथ कथा लेखक भी रहे है |

रामानन्द सागर (Ramanand Sagar) ने सन 1936 से 1942 तक “डेली मिलाप” और “डेली प्रताप” के लिए नियमित रूप से पत्रकारिता की है | वह विभाजन के पश्चात थिएटर से जुड़ गये | यहाँ भी उन्होंने लेखन कार्य किया | उन्होंने पहली फिल्म “बरसात” (1949) लिखी जो कि राजकपूर की यादगार फिल्मो में से एक है | इस फिल्म की सफलता के बाद उनका सम्पर्क एस.एस.वासन से हुआ | वासन के लिए उन्होंने “इंसानियत” (1955) , “राजतिलक” (1956) तथा “पैगाम” (1959) का सर्वप्रथम प्रदर्शन किया |

कालान्तर में उन्होंने “सागर आर्ट” की स्थापना की तथा अपनी बाद की सारी फिल्मे इसी बैनर के तले बनाई | उन्होंने ज्यादातर संगीतमय और प्रेम प्रधान फिल्मो का निर्माण किया है | उनकी उल्लेखनीय फिल्मे है मेहमान (1953),  बाजूबंद (1954), आरजू (1965), आँखे (1968), गीत (1969), ललकार (1972), जलते बदन (1973) ,चरस (1976) , प्रेम बंधन (1978),बगावत (1982), रोमांस (1983) तथा सलमा (1985) |

इन सफलतम फिल्मो के बाद टेलिविज़न की तरफ मुखातिब हुए परन्तु गीत ,संगीत ,प्रेम और रोमांच से चर्चित रामानन्द सागर (Ramanand Sagar) टीवी पर धर्म और पुराण की कथा लेकर आये | मूलतः वाल्मीकि कृत “रामायण” की कथा पर आधारित उन्होंने 78 एपिसोड की लगभग डेढ़ वर्षीय (1978-88) श्रुंखला बनाई जिसका प्रसारण दूरदर्शन पर हुआ | भारतीय दूरदर्शन के इतिहास में “रामायण” को प्रथम सर्वाधिक लोकप्रिय धारावाहिक होने का गौरव हासिल है | “रामायण” पश्चात उन्होंने “श्रीकृष्ण” 1989 का निर्माण भी किया |

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