महान क्रिकेटर रणजीतसिंह जी की जीवनी | Ranjitsinhji Biography in Hindi

0
42
महान क्रिकेटर रणजीतसिंह जी की जीवनी | Ranjitsinhji Biography in Hindi
महान क्रिकेटर रणजीतसिंह जी की जीवनी | Ranjitsinhji Biography in Hindi

कुमार श्री रणजीत सिंहजी (Ranjitsinhji) विभाजी दुनिया के उन महानतम क्रिकेट खिलाडियों से से के थे जो न केवल श्रेष्ठ खिलाड़ी थे वरन भारत में अपने पैतृक गुजरात राज्य के शासक भी रहे | उनके खेल के कौशल को देखकर उनके प्रशंशको ने उन्हें “रन-गेट-सिंह” कहा तो कुछ ने उन्हें रनों की बौछार करने वाला “नाइट” की उपाधि देकर सम्मानित किया | वे मार्च 1907 के बाद से नवागढ़ के महाराजा के रूप में प्रगतिशील शासक और राजनेता रहे | अपनी राजधानी जामनगर में उन्होंने आधुनिक बनाया | प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान फ़्रांस में ब्रिटिश सेना के कर्नल के पद पर स्टाफ ऑफिसर थे | 1920 में जिनेवा सम्मेलन में “लीग ऑफ़ नेशन्स” असेम्बली में भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व किया | 1932 में “इंडियन चैम्बर ऑफ़ प्रिंसेस” के चांसलर बने | रणजी टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले वे फहले भारतीय थे | उन्होंने “द जुबिली बुक ऑफ़ क्रिकेट” की रचना की |

रणजीत सिंह (Ranjitsinhji) का जन्म 10 सितम्बर 1872 को जामनगर के निकट सरोदर गाँव में हुआ था | राजकुमार कॉलेज में प्रवेश लेने के बाद 8 वर्ष की आयु से ही क्रिकेट में रूचि लेना शुरू कर दिया | 1888 में जब वे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए इंग्लैंड गये ,तो वहा के त्रिनित्री कॉलेज की टीम में 1892 में शामिल कर लिए गये | उस समय के तत्कालीन अध्यक्ष लार्ड हैरिस उन्हें टीम में यह कहकर शामिल नही कर रहे थे कि वे एक भारतीय है लेकिन इंग्लैंड की क्रिकेट प्रेमी जनता ने उन्हें ऐसा नही करने दिया | जब उन्हें ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध लॉर्ड्स की इंग्लैंड टीम में पहली बार शामिल  नही किया तो दुसरी बार उन्हें इंग्लैंड की टीम में दुसरे टेस्ट हेतु शामिल किया गया |

इस टेस्ट में उन्होंने 62 रन बनाये | कुल 231 रन में उनके इतने रनों का योगदान महत्वपूर्ण था | दुसरी पारी में 154 रन बनाकर नाबाद रहे | इस तरह उन्होंने 305 की रन संख्या जोडकर अपने कौशल का प्रदर्शन किया | खेल समीक्षकों ने उनके प्रत्येक गेंद पर खेले जाने वाले शॉट की तारीफों के पुल बांधे | रणजीत सिंह इतने रन बनाने के बाद भी खुश नही थे क्योंकि इसमें इंग्लैंड टीम पराजित रही थी | सन 1896 में उन्होंने 10 शतक के साथ 2780 रन बनाकर “सर डब्ल्यूजी ग्रेस” का 25 वर्ष पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया |

1899 में 3000 रन बनाने वाले वे विश्व के प्रथम बल्लेबाज बने | उन्होंने 61.18 की औसत से कुल 3159 रन बनाये | बॉल को वे अपनी कलाई से ऐसा मोड़ते थे कि दर्शक ऐसा समझते थे कि वे प्रत्येक शॉट में चौका ही ल्गायंगे | लोगो ने उनका खेल ही देखा , जीवन की उदासी नही देखी | वे आजीवन अविवाहित रहे | इतनी सम्पन्नता एवं लोकप्रियता के बावजूद घमंड उन्हें छू नही पाया | 1896 से 1900 तक वे विश्व के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज थे | प्रथम श्रेणी क्रिकेट में नाबाद 365 रन बनाने का रिकॉर्ड भी उनके नाम पर है |

रणजीत सिंह (Ranjitsinhji) जीवन भर इंग्लैंड की ओर से खेलते रहे यद्यपि उन्हें वहा के दर्शको से भरपूर प्यार मिला तथापि वे इंग्लैंड में जन्म लेते तो यही प्यार ओर दुगुना हो जाता | वे अश्वेत थे अत: इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा | आज भारत में उनकी पूण्यस्मृति में राष्ट्रीय प्रतियोगिता “रणजीट्राफी ” प्राप्त करने के लिए साल भर मैच खेले जाते है | ऐसे महान व्यक्तित्व 2 अप्रैल 1933 को सदा के लिए चिरनिद्रा में सो गये |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here