रजिया सुलतान की जीवनी | Razia Sultan Biography in Hindi

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रजिया सुलतान की जीवनी | Razia Sultan Biography in Hindi
रजिया सुलतान की जीवनी | Razia Sultan Biography in Hindi

सुल्तान इल्तुतमिश के 1236 में निधन के बाद दिल्ली के तख्त का उत्तराधिकार के लिए शाही परिवार में संघर्ष आरम्भ हो गया था | सुल्तान की एक बेटी थी जिसका नाम था रजिया सुल्ताना (Razia Sultan) | वह अत्यंत बहादुर ,साहसी ,कुशल एवं निष्पक्ष शासक थी | वह बीस पुरुषो पर भी भारी पड़ सकती थी | घुड़सवार भी लाजवाब थी | बेमिसाल तीरंदाज | अद्वितीय तलवारबाज | सुंदर , गढ़ा हुआ सुडौल शरीर , गोरा और गुलाबी रंग | अर्थात किसी भी युवक को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए पर्याप्त आकर्षण |

वास्तव में रजिया (Razia Sultan) ही दिल्ली की सल्तनत को सम्भाल सकती थी और वही शाही सिंहासन की हकदार थी | दिल्ली दरबार में माहौल भी रजिया को सल्तनत सौंपने के पक्ष में था परन्तु कुछ लोग उसके महिला होने की बात कहकर रजिया के दावे को कमजोर कर रहे थे | उनका तर्क था कि जनता किसी भी स्त्री को अपना शासक स्वीकार नही करेगी | रजिया के भाइयो में एक भाई था रुकनुद्दीन | कुछ चाटुकार लोग इस लम्पट , काहिल , जाहिल ,विलासी रुकनुद्दीन को दिल्ली के गद्दी पर बिठाना चाहते थे | वह भी दरबारियों की खुशामद करता था कि एक बार गद्दी पर बैठा दो बस फिर दिल्ली की सल्तनत आपकी | इधर रजिया भटिंडा के सूबेदार अल्तुनिया से प्रेम करती थी | वह उसके लिए कुछ भी कर सकता था | इसके अतिरिक्त इल्तुतमिश के एक चहेता गुलाम भी था जिसका नाम था जमालुद्दीन याकुत | वह भी अल्तुनिया की ही तरह बहादुर था |

सुल्तान के निधन के बाद शाही महल में षड्यंत्र होने लगे | प्रत्येक व्यक्ति दुसरे व्यक्ति को संदेह की नजर से देखने लगा | चारो ओर अनिश्चितता तथा अंधविश्वास का वातावरण था |इधर बजीरे आला ने रजिया के पक्ष को कमजोर करने की चाल चली तथा भटिंडा के सुल्तान अल्तुनिया को राजकाज में उलझा दिया ताकि वह रजिया की मदद न कर सके | इधर रुकनुद्दीन को गद्दी पर बिठाने की तैयारी शुरू कर दी | रजिया (Razia Sultan) को नजरबंद कर दिया | तभी रजिया की नजर अपने विश्वासपात्र गुलाम “याकुत” पर पड़ी |

याकुत रजिया का हमदर्द ,हमराज और हमदम था क्योंकि रजिया ने याकुत से ही तालीम हासिल की थी | याकुत ने रजिया को कैद से निकालने की तरकीब ढूंढी | शाही महल ने इस कारनामे के लिए याकुत को जान पर खेलना पड़ा | इस प्रकार रजिया ने दिल्ली सल्तनत को बर्बाद होने से बचा लिया | रजिया (Razia Sultan) ने सभी का विश्वास जीता और दिल्ली सल्तनत पर अपना अधिकार जमा लिया | उसकी ताजपोशी बड़े धूम-धाम से हुयी भ्रष्ट अधिकारियों को सुधरने का अवसर दिया | जो नही सुधरे उन्हें सजा दी |

अपने विश्वास पात्रो को सल्तनत के संवेदनशील एवं उत्तरदायी पदों पर नियुक्त किया |अपने विशेष साथी गुलाम जमालुद्दीन याकुत को अपना विशेष अंग्ररक्षक नियुक्त किया | इधर रजिया तथा याकुत के प्रेम-संबध दिन-प्रतिदिन उजागर होते गये | कुछ समय बाद रजिया ने याकुत को अपना सेनापति बना दिया और बाद में उसे अपना पति बना लिया | अब तक रजिया की ताकत इतनी बढ़ गयी थी कोई उस पर अंगुली उठाने का साहस नही कर सकता था |

इधर भटिंडा का सूबेदार अल्तुनिया भी रजिया के साथ विवाह के सपने देख रहा था | उधर उसे यह खबर मिली की रजिया (Razia Sultan) ने गुलाम से निकाह कर लिया | बस सुनते ही वह आग बबूला हो गया और सैनिको सहित दिल्ली की ओर चल पड़ा | जब यह खबर रजिया को मिली तो पहले उसे विश्वास नही हुआ कि उसके बचपन का दोस उस पर हमला करेगा | वह भी दिल्ली सल्तनत के लिए | फिर भी रजिया ने अपने वजीर और सिपहसलार को बुलाकर मन्त्रणा की और यह तय किया कि अल्तुनिया के विद्रोह को कुचल दिया जाएगा | रजिया ने अल्तुनिया की चुनौती का माकूल जवाब देने के लिए शाही सेना लेकर भटिंडा के लिए रवाना हो गयी |भटिंडा के दक्षिण में दोनों सेनाओं का जमावड़ा एकत्र हो गया |रजिया ने संदेशवाहक द्वारा संदेश भेजा कि अल्तुनिया अपनी बागी हरकतों से बाज आये | उसके उत्तर में संदेशवाहक को अपमानित करके लौटा दिया गया |

अंतत: दोनों की तलवारे तन गयी | युद्ध हुआ किन्तु शाही सेना में वफादारी की कमी के कारण रजिया का सबसे विश्वासपात्र गुलाम याकुत मारा गया | रजिया की शाही सेना ने रजिया का साथ नही दिया और रजिया को गिरफ्तार कर लिया गया | दिल्ली में औरत की गुलामी से मुक्ति पाने का पर्व मनाया गया | कैद में बांधकर रजिया (Razia Sultan) को अल्तुनिया के सामने पेश किया गया | कहा दिल्ली सल्तनत की शाही तख्त की मलिका और कंहा दिल्ली दरबार का एक विश्वासपात्र सूबेदार | सूबेदार ने रजिया के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा जो उसकी मुक्ति की भी शर्त थी | रजिया ने अन्य कोई विकल्प न देख विवाह की शर्त मान ली क्योंकि वह दिल्ली सल्तनत को सुरक्षित देखना चाहती थी |

अल्तुनिया के शर्त के अनुसार रजिया (Razia Sultan) और अल्तुनिया का विवाह हुआ | कुछ दिन बाद उन्होंने मिलकर दिल्ली सल्तनत को वापस लेने के लिए आक्रमण किया | युद्ध हुआ | निर्णायक युद्ध हुआ और रजिया (Razia Sultan) तथा अल्तुनिया का कत्ल कर दिया गया | इस प्रकार हिंदुस्तान की प्रथम स्त्री शासक का अंत हो गया | यह सब केवल इसलिए हुआ कि इस्लाम में स्त्री को इतनी व्यापक स्वतंत्रता सहन नही हटी |वैसे सभी कोई पुरुष स्त्री की सत्ता को सहर्ष सहन नही करता |

ऊनके शवो को दिल्ली लाया गया ताकि जनता देख ले कि एक स्त्री के सत्ता सम्भालने का क्या परिणाम होता है | रजिया सुल्तान के शव को दिल्ली से दूर जंगलो में दफना दिया गया | यह स्थान आजकल तुर्कमान दरवाजे के समीप है | रजिया सुल्तान को बड़े अपमान तथा उपेक्षा के साथ दफनाया गया | इतिहास ने महिला शासक का विधिवत उल्लेख तो किया परन्तु अब तक हिंदुस्तान की इस प्रथम महिला शासक को सम्मान नही दिया |

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