Sachindra Nath Sanyal Biography in Hindi | सचिन्द्रनाथ सान्याल की जीवनी

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Sachindra Nath Sanyal Biography in Hindi
Sachindra Nath Sanyal Biography in Hindi

सचिन्द्रनाथ सान्याल (Sachindra Nath Sanyal) का जन्म 3 जून 1893 को बनारस में हुआ था | हरनाथ सान्याल उनके पिता और क्षीरोदा बासनी देवी उनकी माता का नाम था | उनके पितामह आदि गृहस्थ सन्यासी थे | उनके भाई जतिंद्रनाथ एवं भूपेन्द्रनाथ बहुत महान क्रांतिकारी थे जो भारत माँ की परतंत्रता की बेडियां काटने के लिए लड़े थे | सचिन अभी विद्यार्थी ही थे कि पिताजी का देहांत हो गया | वह घर में सबसे बड़े पुरुष सदस्य थे | माँ ने उनका अनेक आर्थिक संकटो के बीच पालन-पोषण किया |

सचिन (Sachindra Nath Sanyal) ने ढाका अनुशीलन समिति की एक शाखा बनारस में स्थापित की | सरकार इसके नाम से ही सतर्क हो गयी अत: उन्होंने इसका नाम “यंगमेन एसोसिएशन” रख दिया | इसमें शारीरिक विकास के लिए खेलकूद आदि करवाए जाते थे | इसके माध्यम से सचिन युवको को क्रांतिकारी बनाना चाहते थे | वह रास बिहारी बोस के सहायक थे जो भारतीय सेना में क्रान्ति कराना चाहते थे | 23 दिसम्बर 1912 को वायसराय लार्ड हार्डिंग पर दिल्ल्ली में बम फेंके जाने के बाद रास बिहारी बोस सचिन के साथ बनारस में रहे |

बनारस क्रान्तिकारियो का केंद्र बन गया | गदर पार्टी के हजारो कार्यकर्ता अमेरिका से आकर बनारस में इस केंद्र से जुड़ गये | वे लोग सेना को भी क्रान्ति करने के लिए प्रेरित कर रहे थे | विष्णु गणेश पिंगले के आने के बाद ये गतिविधिया तेज हो गयी | सचिन (Sachindra Nath Sanyal) पिंगले के साथ पंजाब गये | वहा करतार सिंह सराभा के नेत्रुत्ब में क्रांतिकारियों की गतिविधियों में वृद्धि हो रही थी | 21 फरवरी 1915 को सेना क्रान्ति करने को तैयार थी किन्तु 21 की जगह 19 फरवरी क्रान्ति का दिन निर्धारित किया गया |

इसकी सुचना कृपाल सिंह नामक मुखबिर ने ब्रिटिश सरकार को दे दी और सेना के हथियार छीन लिए गये | उसके बाद बहुत से क्रांतिकारी पकड़े गये और उन्हें काले पानी या लम्बी सजाये दी गयी और कुछ को फाँसी दे दी गयी | रास बिहारी जापान चले गये ताकि क्रान्तिकारियो के लिए अस्त्र-शस्त्र का प्रबंध कर सके | उनके जाने के बाद सचिन पर भारी उत्तरदायित्व आ गया | 16 जून 1915 को सचिन भी पकड़े गये | उनके भाई भी बंदी बना लिए गये | उनके सात सहयोगी और वह बनारस षडयंत्र में पकड़े गये और विभूति सरकारी गवाह बन गया |

सचिन (Sachindra Nath Sanyal) को काले पानी की सजा मिली और अगस्त 1916 में उनको अंडमान भेजा गया | माँ और उसके छोटे भाई को बहुत कष्ट झेलने पड़े | फरवरी 1920 में आम माफी में उनको छोड़ दिया गया | मुख्य भूमि पर आने के बाद वह शीर्ष नेताओं से मिले और काले पानी की सजा काट रहे कैदियों को छुडाने का प्रस्ताव रखा | सन 1920 में नागपुर कांग्रेस अधिवेशन में यह प्रस्ताव भी पास हो गया | उधर उनकी घर की आर्थिक दशा बहुत खराब हो रही थी | इसी समय प्रतिभा देवी से उनका विवाह हो गया |

अब सचिन (Sachindra Nath Sanyal) ने बिखरे हुए क्रान्तिकारियो को हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन के नाम से संघठित करने का प्रयास किया | उन्होंने देखा कि सरकार उनको फिर बंदी बना लेगी तो वह फ्रेंच सरकार के बुलावे पर चन्दननगर चले गये | वहा से पीला पर्चा एवं The Revolutionary प्रकाशित करते थे | उन्होंने कुछ लोगो को विदेशो में भी भेजा ताकि वे भारत की स्वतंत्रता के समर्थन में प्रचार कर सके | वह कोलकाता लौट आये और 25 फरवरी 1925 को पुनः कैद कर लिए गये | देशद्रोह के आरोप में 2 साल का कठोर कारवास का दंड दिया गया |

काकोती रेल डकैती में 9 अगस्त 1925 में सचिन (Sachindra Nath Sanyal) को भी फंसाया गया और उनको फिर आजीवन कारवास का दंड दिया गया | सन 1928 में उनकी माँ की भी मृत्यु हो गयी | 1937 तक वह विभिन्न जेलों में भेजा गया | उनकी पुस्तक “बंदी जीवन” आत्मकथा है परन्तु यह भारत में क्रांति का इतिहास भी है | वह फिर जेल से छूटे और इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्य बने | डिफेन्स इंडिया एक्ट में उनको 1940 में फिर पकड़ लिया गया | अब उनका स्वास्थ्य जर्जर हो गया था और वह क्षय रोग से ग्रसित हो गये | 6 फरवरी 1943 को यह महान स्वतन्त्रता सेनानी इस संसार को छोड़ गया | भारत माँ को स्वतंत्र कराने का अपूर्ण स्वप्न लेकर वह चला गया |

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