Samuel Morse Biography in Hindi | टेलीग्राफी के अविष्कारक सेमुएल मोर्स की जीवनी

0
119
Samuel Morse Biography in Hindi
Samuel Morse Biography in Hindi

टेलीग्राफी के निर्माता फिनले मोर्स (Samuel Morse) का जन्म 27 अप्रैल 1791 को अमेरिका के बोस्टन शहर में हुआ था | जिस प्रकार अधिकाँश अविष्कारक गरीबी में पले -बढ़े , उसी प्रकार फिनले मोर्स (Samuel Morse) भी एक निर्धन परिवार में उत्पन्न हुआ था | बालक ज्यो ज्यो बड़ा होता गया त्यों त्यों उसके माता पिता को अनुभव होने लगा कि बच्चे का मन पढाई में बहुत लगता है | किन्तु उनके पास उसको पढाने का कोई साधन नही था | तदपि पिता को उस पर प्यार आया और उसने उसको स्कूल में प्रविष्ट कराकर किसी प्रकार मांग तांग कर उसकी पढाई का प्रबंध कर दिया |

इस प्रकार उसने जब स्कूल की पढाई पुरी कर ली तो कॉलेज में भी प्रवेश की किसी प्रकार व्यवस्था हो गयी यद्यपि स्कूल की अपेक्षा कॉलेज में पढाई का खर्च अधिक था | पढाई के साथ साथ फिनले मोर्स को चित्र बनाने का भी चाव था | तब तक कैमरे का आविष्कार नही हुआ था | हाथी दांत पर चित्र उकेरे जाते थे | फिनले मोर्स ने भी हाथी दांत पर चित्र बनाने आरम्भ कर दिया | उन चित्रों को वह बाजार में जाकर बेच आता था और इस प्रकार अपने कॉलेज का व्ययभार कुछ हल्का कर रहा था किन्तु धन के अभाव में उसको कॉलेज की पढाई मध्य में ही छोड़नी पड़ी |

फिनले मोर्स (Samuel Morse) को लगा कि कॉलेज तो उसने छोड़ दिया किन्तु अब करे तो क्या करे | व्यर्थ में अपने पिता पर बोझ बना वह घर पर बैठा है | अत: उसने इंग्लैंड जाने का विचार बनाया मार्ग व्यय के लिए उसने अपने मित्रो आदि से मांग मांग कर धन एकत्रित किया और इंग्लैंड चला गया | चार वर्ष तक इंग्लैंड में रहकर पढाई की और जब वापस घर आया तो फिर वही निर्धनता का आलम | उसने चित्र बनाकर बेचने आरम्भ किये | काम नही चला | फिर उसने अपने भाई के साथ मिलकर पानी का पम्प बनाया जिससे पानी उपर खींचा जा सकता था किन्तु उनका यह काम भी नही चला और उनकी आर्थिक स्थिति वैसी ही बनी रही |

फिनले (Samuel Morse) ने एक बार फिर घर छोड़ने का निश्चय किया और वह यूरोप चला गया किन्तु उसके दुर्भाग्य ने उसका साथ नही छोड़ा , निराश वापस अमेरिका आ गया | जिस जहाज में वह वापसी की यात्रा कर रहा था उसमे यात्रा के दौरान उसको विदित हुआ कि बिजली के तारो से किसी प्रकार के संदेश  इधर से उधर भेजे जा सकते है | यह सुनकर फिनले मोर्स ने इस काम को हाथ में लेने का निश्चय कर लिया | उसके मन ही मन टेलीग्राफ की भाषा का आविष्कार भी तभी कर लिया |

फिनले (Samuel Morse) अपने बाल्यकाल में बिजली की तारो से खेलता रहा था | उसने घर पहुचते ही संदेशवाहक (टेलीग्राफी) का कार्य करने का प्रयोग आरम्भ कर दिया | किन्तु उसके लिए भी तो रुपया चाहिए था | भाइयो ने उसकी थोड़ी सहायता कर बिजली के तारो और कमरे की व्यवस्था कर दी | फिनले ने एक यंत्र तैयार किया | इश्वर की कृपा रही कि उन्ही दिनों उसको एक कॉलेज में प्राध्यापक का स्थान मिल गया | कॉलेज से आते ही वह अपने काम में जुट जाया करता था | उसके एक शिष्य ने उसकी लगन देखकर उसकी कुछ आर्थिक सहायता करने की पेशकश की और स्वयं भी वह उसके साथ प्रयोग करने में सम्मिलित हो गया | फिनले मोर्स के उस शिष्य का नाम था एल्फ्रेड बेल |

फिनले (Samuel Morse) के दिन फिरने लगे | एल्फ्रेड बेल , साथी अध्यापक कैंबल और एक अन्य शिष्य ने मिलकर कई दिनों तक इस प्रकार के प्रयोग किया | एल्फ्रेड बेल के पिता के कारखाने के कोने में बने एक कमरे में उनके ये प्रयोग होते थे | उन्हें सफलता मिलने लगी | फिनले अपने पिता से अपनी प्रसन्नता व्यक्त कर रहा था कि पिता ने कहा “मै तो तब मानूंगा , जब तुम्हारा यह संदेश उचित स्थान पर पहुचवा दो” | फिनले ने अपने पिता से संदेश लिया और अपने साथियो के साथ मिलकर उसने उस संदेश को टेलीग्राफ के माध्यम से यथास्थान पहुचाने का कार्य किया | सभी साथियो को यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुयी कि संदेश यथास्थान पहुच गया है | कालान्तर में अमेरिकी सरकार को फिनले की मशीन के विषय में ज्ञात हुआ तो उसको बुलाया गया |

सरकार उसकी मशीन से लाभ उठाना चाहती थी किन्तु उनका व्ययभार वहन करने में उसको कुछ विलम्ब हो गया | आखिर में उसकी व्यवस्था भी हुयी | बिजली के तार बिछाने के लिए फिनले को बहुत देर तक कार्य करना पड़ा | लकड़ी के खम्भों पर तार लगाये गये थे | सब तैयारी हो जाने पर जो पहला सार्वजनिक संदेश भेजा गया “जेम्स जी. पोलक को अमेरिका का राष्ट्रपति मनोनीत किया गया है ” | फिनले मोर्स की इस सफलता ने उसको सारे संसार में प्रसिद्ध कर दिया | इस प्रकार निरंतर प्रयत्न करते हुए उसके अंत में सफलता का मुख देखा | 2 अप्रैल 1872 को फिनले का देहांत हो गया किन्तु संसार को अपनी अमर कृति देकर वह स्वयं अमर हो गया |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here