सावे दादा , भारत में पहली मोशन पिक्चर बनाने वाले प्रथम भारतीय | Save Dada Biography in Hindi

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Harishchandra Shankaram Bhatavdekar Save Dada Biography in Hindi
Harishchandra Shankaram Bhatavdekar Save Dada Biography in Hindi

हिंदुस्तान में सिनेमा के भारतीय संवर्धको में हरीशचंद्र सखाराम भाटवाडेकर उर्फ़ सावे दादा (Save Dada) का नाम काफी आदर से लिया जाता है | सावे दादा उस समय के एक स्थापित छायाकार थे | ल्यूमियर के छायाचित्रों की प्रदर्शनी से वह भी गहरे तौर पर प्रभावित हुए थे | सावे दादा पहले भारतीय थे जिन्होंने सबसे पहले लन्दन से कैमरा मंगवाया था और वृतचित्र का निर्माण किया | 1899 में मुम्बई के हैंगिग गार्डन में तब के मशहूर पहलवान पुंडलिक दादा और कृष्णा नावी के बीच कुश्ती का आयोजन किया गया था जिसका फिल्मांकन सावे दादा (Save Dada) ने किया था |

सावे दादा (Save Dada) की दुसरी फिल्म सर्कस के बंदरो को प्रशिक्षित किये जाने के विषय पर आधारित थी | इन दोनों फिल्मो को धुलने के लिए लन्दन भेजा गया था और सन 1899 में इन्हें भारत में विदेशी फिल्मो के साथ प्रदर्शित किया गया था | दोनों ही फिल्मो को भारतीय और विदेशी दोनों दर्शको ने पसंद किया था | भारत का पहला वृतचित्र बनाने का श्रेय सावे दादा को जाता है | 1901 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की परीक्षा में एक भारतीय विद्यार्थी र.पु.पराजंपे ने गणित में सर्वाधिक अंक प्राप्त किये थे |

इस छात्र के आगमन पर हजारो लोग मुम्बई बन्दरगाह पर एकत्र हुए थे | परापंजे का स्वागत पुष्प वर्षा से किया गया था | यह बेहद रोमांच और उत्साह का समय था | इसमें भारतीय और अंग्रेज दोनों ही शामिल थे | सावे दादा (Save Dada) ने इस दौरान की सभी गतिविधियों को अपने कैमरे में कैद किया था | सन 1901 में यह फिल्म बनाई गयी थी | यह भारत का पहला वृतचित्र माना जाता है | ख़ास बात यह है कि ये फिल्मे पुरी तरह से गतिशील थी |

इसी तरह सावे दादा (Save Dada) ने 1903 में एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक के दृश्यों को भी अपने कैमरे में कैद किया था | जिसे फिल्म के रूप में प्रदर्शित किया गया तो दर्शको के उत्साह की सीमा नही रही | सावे दादा की फिल्मो और छायाचित्रों को देखकर नई पीढ़ी के शौकीनों और कलाकारों का इस कला की ओर झुकाव हुआ और एक नई संस्कृति सी बनने लगी | राजा-महाराजाओं , दशहरा ,दीवाली , होली ,ईद ,क्रिसमस आदि अन्य त्योहारों ,उत्सवो की फिल्मे बनाई जाने लगी | सिनेमा के सूत्रधार सावे दादा का जन्म 15 मार्च 1868 को हुआ था और अपने जीवन में हिंदी से लेकर रंगीन फिल्मो का प्रचलन देखने के बाद 20 फरवरी 1958 में सावे दादा (Save Dada) का देहांत हो गया |

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