Sher ali Afridi Biography in Hindi | स्वतंत्रता सेनानी शेर अली आफरीदी की जीवनी

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Sher ali Afridi Biography in Hindi
Sher ali Afridi Biography in Hindi

1757 में ब्रिटिश लोगो की चालाकी एवं धूर्तता के कारण प्लासी के युद्ध में भारतीय स्वतंत्रता छीन ली गयी उस समय से ही भारत में कभी यंहा तो कभी वहां स्वतन्त्रता के लिए संघर्ष होते रहे | सन्यासियों एवं फकीरों ने भी संघर्ष किया | कुछ समय बाद वाहबी आन्दोलन उत्तर-पश्चिमी सीमान्त से बंगाल तक फ़ैल गया जिसने अंग्रेजो को चुनौती दी |  मूल रूप से यह आन्दोलन अरब से आरम्भ हुआ जो भारत तक फ़ैल गया | प्रारम्भ में यह केवल धार्मिक आन्दोलन था किन्तु बाद में यह शोषक शासन के विरुद्ध परिवर्तित हो गया |

प्रारम्भ में इसका मुख्यालय उत्तर-पश्चिमी सीमान्त था किन्तु बाद में पटना लाया गया | ब्रिटिश के लिए यह बहुत बड़ा सिरदर्द बन गया | ब्रिटिश शासन ने वाहाबी आन्दोलन कार्यकर्ताओं पर 1852, 1858 एवं 1863 में आक्रमण करके कुचल दिया था | उनको भी भारी नुकसान उठाना पड़ा | 847 ब्रिटिश शासक मारे गये या गम्भीर रूप से घायल हो गये | उनका नायक चेम्बरलीन भी मारा गया | 9000 वाहाबी युद्ध में लड़े थे | 1863 में वाहाबी बन्दियो पर अम्बाला में और 1863 में पटना में मुकदमे चलाय गये और मृत्युदंड एवं आजीवन कारावास दिया गया | शेर अली पठान (Sher ali Afridi) भी क्रांतिकारी था जो बंदी बना लिया गया |

शेर अली पठान (Sher ali Afridi) को अंडमान निकोबार भेजा गया | वहा उन कैदियों को जो खतरनाक न हो उन्हें सेल्यूलर जेल से बाहर रहने की इजाजत दे दी जाती थी और उनके सड़क बनाने और जंगल साफ़ करने का काम करवाया जाता था | शेर अली के उत्तम व्यवहार के कारण उसको भी यह सुविधा प्राप्त हो गयी वह प्रसन्न दिखाई देता था और जो भी काम उसको दिया जाता ठीक तरह पूरा करके अधिकारियों का चहेता बन गया था परन्तु वह सदैव अंग्रेजो से बदला लेने की बात सोचता रहा परन्तु प्रश्न यह था कि उस द्वीप पर वह बदला कैसे ले ?

शेर अली (Sher ali Afridi) अपराधी अंग्रेज सरकार को समाप्त करना चाहता था | वह कुछ ऐसा कार्य करना चाहता था जिससे अंग्रेजो का घमंड चूर हो और वह समझ सके कि भारतीय लोगो की भी इज्जत है और वे शोषण एवं अपमान का बदला लेना जानते है | उसके हृदय में बदले की आग जल रही थी किन्तु कोई मार्ग नही सूझ रहा था | उस तरह की परिस्थिति में घोषणा हुयी कि तत्कालीन गर्वनर जनरल ऑफ़ इंडिया के अंडमान आने का कार्यक्रम सुनिश्चित हो चूका है |

यह सुनकर शेर अली (Sher ali Afridi) प्रसन्न हो गया और उसने सोचा कि अब अवसर आ गया है जब मै शोषको के उच्चतम प्रतिनिधि को मारकर बदले की आग को शांत कर सकता हु | शेर अली के सम्मुख समस्या यह थी कि उसके पास इस काम को अंजाम देने के लिए कोई हथियार नही था | वायसराय की सुरक्षा का भी भारी बन्दोबस्त किया होगा | वह अपना उद्देश्य कैसे पूरा कर पायेगा | शेर अली ने अपने जीवन को दांव लगाने का निश्चय किया | वह अपने प्राणों की बलि देकर भी वायसराय को मारकर बदला लेना चाहता था |

लार्ड मयो हॉप टाउन जैटी पर उतरकर माउंट होरीयत के लिए रवाना हो गये | शेर अली रास्ते में एक बड़े पत्थर के पीछे छिपा हुआ था | जैसे ही मयो की गाड़ी सामने आयी वह गाड़ी पर कूद गया और उसने उसकी गर्दन पकड़कर चाकू से कई वार कर दिए | वायसराय के सुरक्षाकर्मी यह देखकर स्तम्भित थे वे समझ भी नही सके कि ये क्या हुआ ? कुछ ही पलो में शेर अली ने अपना काम कर दिया | मयो के बचाने के प्रयत्न बेकार हुए और वह वही मर गया |

शेर अली (Sher ali Afridi) संतुष्ट था और उसको अंडमान के अपमानजनक जीवन से मुक्ति मिल गयी | उसको पकड़े जाने के बाद भयंकर यातनाये दी गयी और अंत में 8 फरवरी 1872 के दिन पोर्ट ब्लेयर के बॉस वाइपर द्वीप पर फांसी दी गयी | शेर अली को मरने का कोई दुःख नही था | वह हंसते हंसते फांसी पर चढ़ गया | शेर अली का नाम इतना प्रसिद्ध नही हो सका परन्तु उसकी शहादत गौरवपूर्ण थी | काले पानी कहे जाने वाले अंडमान पर उसने को कार्य किया वह प्रशसंनीय है | इतिहास में ऐसा उदाहरण विरल ही है | शेर अली ने शोषक सरकार के प्रतिनिधि की जान लेकर अपने हृदय में धधकती प्रतिशोध की अग्नि को शांत कर लिया |

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