Sir Charles Parsons Biography in Hindi | भाप टरबाइन के अविष्कारक सर चार्ल्स पारसन्स की जीवनी

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Sir Charles Parsons Biography in Hindi | भाप टरबाइन के अविष्कारक सर चार्ल्स पारसन्स की जीवनीपारसन्स (Sir Charles Parsons) एक अंग्रेज इंजिनियर थे जिन्होंने प्रयोगात्मक भाप टरबाइन का आविष्कार किया था | सन 1884 में जब इनकी उम्र 30 वर्ष थी इन्होने एक फर्म में काम करना शुरू किया जिसक नाम गेट्स हेड था | यह कम्पनी एक प्रकार के स्टीम इंजन बनाती थी | इनके मस्तिष्क में आया कि इन इंजनों की दक्षता कई गुना बढाई जा सकती है | इनका ख्याल था कि यदि इन इंजनों में एक कम्पन्न करती हुयी धुरी लगा दी जाए तो इनकी दक्षता कई गुना बढाई जा सकती है | इसको उन्होंने भाप टरबाइन का नाम दिया |

चार साल की अवधि में इन्होने ऐसी 200 मशीने बनाई जिन्हें पानी के जहाजो में प्रकाश पैदा करने ले लिए प्रयोग किया गया | पारसन्स (Sir Charles Parsons) को जन्म से ही इंजिनियरी के कार्यकलापो में बड़ी दिलचस्पी थी | वो कुछ न कुछ बनाते रहते थे | सन 1889 में इन्होने अपनी इंजिनियरी के फर्म खोली और इसने शहर में विद्युत केंद्र स्थापित करने के लिए दो मशीने बनाई | इनकी एक कम्पनी न्यूकेसल में थी | इन मशीनों को लगाने पर सारे शहर में रोशनी हो गयी |

इसके पांच साल पश्चात पारसन्स (Sir Charles Parsons) ने नेविंग स्टीम कम्पनी बनाई और 44 टन की पहली टरबाइन एक जलयान में लगाई जिसका नाम टरबानिया था | पहले-पहल इस प्रकार की टरबाइन का थोडा विरोध हुआ लेकिन इसकी सफलता को देखकर सभी जल सेना के लोग खुश हो गये | सन 1897 में डायमंड जुबली पर महारानी विक्टोरिया ने इस कार्य का बहुत आदर किया | यह मशीन बहुत उपयोगी सिद्ध हुयी | इस प्रकार महान सफलता के बाद पारसन्स ने टरबाइन चलित दो वाइपर और कोबरा यान बनाये |

1905 में बाकी जल सेना ने यह घोषित किया कि सभी लडाकू जलयानो में टरबाइन लगा दिए जाए | परमानिया नामक जलयान के लिए 30 हजार टन वाली टरबाइन बनाई गयी इसके दो साल बाद एक दुसरी टरबाइन दुसरे जलयान में लगाई गयी | यह अपनी यात्रा पर न्युयोर्क से क्वींस टाउन तक गये और चार दिन बाईस घंटे के रिकॉर्ड टाइम में यात्रा पुरी की | यह टरबाइन सन 1907 से 1931 तक अंध महासागर में चलती रही |

पारसन्स (Sir Charles Parsons) को सन 1911 में विशेष सम्मान प्रदान किया गया | इन्होने 300 से अधिक पेटेंट कराए | मोटर चालक आज भी इनके विशेष आभारी है क्योंकि इन्होने न खिसकने वाली कारो की चेन का अविष्कार किया था | इस महान अविष्कारक का 1931 में देहांत हो गया था | इनके द्वारा टरबाइन क्षेत्र में किये गये कार्यो को हमेशा याद रखा जाएगा |

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