सिस्टर निवेदिता की जीवनी | Sister Nivedita Biography in Hindi

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सिस्टर निवेदिता की जीवनी | Sister Nivedita Biography in Hindi
सिस्टर निवेदिता की जीवनी | Sister Nivedita Biography in Hindi

बहुमुखी प्रतिभा की धनी सिस्टर निवेदिता (Sister Nivedita) का जन्म 28 अक्टूबर 1867 को आयरलैंड के आलस्टर नगर के समीप को-टाईटोन के दुंगानॉन में हुआ था | उनका वास्तविक नाम था मारग्रेट नोबेल | उनके पिता एक चर्च में उपनिदेशक थे तथा स्वाधीनता के प्रबल समर्थक थे | दुर्भाग्यवश वे अपनी पुत्री को छोटी आयु में ही छोडकर चल बसे किन्तु बचपन में अपने पिता के साथ गरीबो से मिलने जाती थी तथा यथाशक्ति उनकी आर्थिक सहायता भी करती थी | पिता एवं पुत्री दोनों ही आयरिश होमरूल आन्दोलन से सक्रिय रूप से जुड़े थे | अपने पिता से प्राप्त संस्कारो के परिणामस्वरूप वे समाजसेवा तथा ईश्वरभक्ति को अपने जीवन का लक्ष्य मानती थी |

पिता के असामयिक निधन के बाद वे अपनी बहन के साथ शिक्षा प्राप्ति के लिए “हेलीफेक्स कॉलेज” चली गयी | अध्ययन में गहरी रूचि होने के कारण वे हमेशा कुशाग्र बुद्धि की स्वामी थी तथा संगीत एवं प्राकृतिक विज्ञानों में अच्छी योग्यता प्रदर्शित की | 17 वर्ष की अल्प आयु में ही उन्होंने विद्याअध्ययन पूरा किया तथा अध्यापन कार्य में जुट गयी | इसी बीच वे आयरिश क्रान्तिकारियो के सम्पर्क में आयी | इस प्रकार वे अध्यापन ,समाज सेवा तथा स्वाधीनता आन्दोलन के प्रति समर्पित हो गयी |

वर्ष 1896 में स्वामी विवेकानंद से दुसरी भेंट के समय ही उन्होंने भारत की सेवा करने के निर्णय लिया तथा समाज सेवा का व्रत लेकर वे 28 जनवरी 1898 को भारत आ गयी | विवेकानंद ने उन्हें एक ही मन्त्र दिया कि Love India ,Serve India अर्थात भारत से प्यार करो , भारत की सेवा करो | सिस्टर निवेदिता स्वामी विवेकानंद से इतनी प्रभावित हुयी कि उन्होंने उन्हें अपना गुरु बना लिया तथा उनके द्वारा दिए गये मूल मन्त्र का अक्षरक्ष पालन किया | स्वामी विवेकानंद ने उन्हें नया नाम दिया | निवेदिता | बस देखते ही देखते मार्गेट नोबल “सिस्टर निवेदिता” के नाम से समाज सेवा करने लगी | भारत ,भारतवासी ,भारतीय ,संस्कृति ,भाषा ,शिक्षा दर्शन और भारतीय स्वाधीनता के लिए स्वयं को उत्सर्ग कर वह सच्चे अर्थो में निवेदिता कहलाई |

आजीवन अविवाहिता सन्यासिनी सिस्टर निवेदिता (Sister Nivedita) ने 14 वर्षो तक भारतीय समाज में शिक्षा और जन-जागरण का बीज मन्त्र फूंका | भारतीयों को चेतना लाने के लिए सघन प्रयास किया | भारतीय स्वाधीनता की प्रबल समर्थक होने के कारण उन्होंने अपने ढंग से सक्रिय योगदान किया | आयरिश क्रांतिकारीयो से उन्हें प्रेरणा एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ | 1902 में उन्होंने बडौदा हाकर अरविन्द का कार्य निकट से देखा और फिर कोलकाता लौटकर क्रांतीवादी साहित्य से सम्पन्न अपनी मूल्यवान लाइब्रेरी को उन्होंने बंगाल के क्रान्तिकारियो को सौंप दिया |

उन्होंने कुछ समय तक सरला देवी तथा महर्षि अरविन्द के साथ कार्य किया और फिर अपने शिक्षा और सामजिक कार्यक्षेत्र में व्यवधान न आने देने के कारण अलग रहकर अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें प्रेरणा एवं सहायता प्रदान करने लगी | 1905 ईस्वी में लार्ड कर्जन नामक गर्वनर के भाषण का विरोध किया | इस विरोध प्रदर्शन के लिए वे भाषण के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रही | इस भाषण की असत्यता प्रमाणित करने के लिए उन्होंने 13 फरवरी 1905 की अमृत बाजार पत्रिका में एक लेख भी लिखा | “बंग-भंग आन्दोलन” के समय उन्होंने कई राष्ट्रीय गान एवं कविताये लिखी | ये सभी इतने लोकप्रिय हो गये कि स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी इन कविताओं तथा गीतों को हर समय गुनगुनाते रहते थे |

1906 के अकाल एवं बाढ़ के समय उन्होंने घर घर जाकर सेवा कार्य किया | सार्वजनिक सभाओं में स्वदेशी वस्तुओ की पुरजोर वकालत की | 1907 में स्वामी विवेकानंद के छोटे भाई उपेन्द्रनाथ दत्त ने “युगांतर” पत्र का सम्पादन किया | उसके पीछे की प्रमुख प्रेरणा स्त्रोत सिस्टर निवेदिता (Sister Nivedita) ही थी | उपेन्द्रनाथ दत्त की गिरफ्तारी के समय अदालत में जाकर उसकी जमानत देने से भी वे पीछे नही हटी | इस प्रकार उन्हें जमानत पर छुड्वाया |

अनेक राष्ट्रीय नेता , विद्वान , कलाकार , पत्रकार तथा क्रांतिकारी उनके घर आया करते थे | जिनमे प्रमुख थे अरविन्द घोष , गोपालकृष्ण गोखले , विपिन चन्द्र पाल , रवीन्द्रनाथ ठाकुर , जगदीशचन्द्र बसु आदि | 7 अक्टूबर 1957 को उनकी मृत्यु के समय भी जगदीशचन्द्र बसु तथा उनकी पत्नी अबला बसु उनके पास थे | इस प्रकार सिस्टर निवेदिता का भारत के राष्ट्रीय क्रांतिकारी आन्दोलन तथा असहयोग आन्दोलन में सक्रिय योगदान है | यद्यपि वे स्वाधीनता संग्राम से सीधी जुडी हुयी नही थी तथापि वे इस आन्दोलन की थिंक टैंक के रूप में अवश्य सहयोग करती रही | अपने पुस्तकालय , लेखो ,समर्थन तथा रचनात्मक कार्यो के माध्यम से उन्होंने भारतीय समाज एवं राष्ट्र की निरंतर सेवा की | कृतज्ञ राष्ट्र का प्रत्येक नागरिक सिस्टर निवेदिता के योगदान के सामने नतमस्तक है तथा उन्हें युगों युगों तक स्मरण करता रहेगा |

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