Sucheta Kriplani Biography in Hindi | सुचेता कृपलानी की जीवनी

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Sucheta Kriplani Biography in Hindi | सुचेता कृपलानी की जीवनी
Sucheta Kriplani Biography in Hindi | सुचेता कृपलानी की जीवनी

सामाजिक वास्तविकता को आज भी सही रूप में नही , पक्षपात की दृष्टि से देखा जा रहा है पर आज का स्वीकृत ध्येयवाद परिवर्तन की मांग कर रहा है | भारतीय स्त्री में निहित सहनशीलता और सहानुभूति की शक्ति के बल पर वह सामाजिक क्रान्ति की अग्रणी बन सकती है अत: “स्त्री के नवीन नेतृत्व को उसके भविष्य को आशामय रूप में देखकर प्रतिगामी शक्तियों से हमे अर्थपूर्ण चर्चा कर लेनी है ” ये विचार थे श्रीमती सुचेता कृपलानी (Sucheta Kriplani )के , जो सामाजिक और राजनीतिक दोनों क्षेत्रो में सफल नेतृत्व की क्षमता रखती थी |

भारतीय राज्यों में उत्तर प्रदेश ने विजयलक्ष्मी पंडित को प्रथम कांग्रेस मंत्रीमंडल में मंत्री पद देकर सरोजिनी नायडू को राज्यपाल बनाकर इस दिशा में पहल कर ही ली थी | श्रीमती सुचेता कृपलानी (Sucheta Kriplani )भी इसी राज्य की मुख्यमंत्री बनकर भारत की “पहली महिला मुख्यमंत्री” कहलाई | उत्तर प्रदेश का यह गौरव समस्त भारतीय महिलाओं का गौरव रहा | सुचेता जी को एक ऐसी महत्वकांक्षी महिला माना जाता है जिनकी आकंशाये देश की ओर अभिमुख थी और उन्नति के साथ जुड़ी थी | सामजिक एवं रचनात्मक क्षेत्रो में काम करती हुयी एक एक पग वे आगे बढती गयी | महिलाये , शरणार्थी , श्रम संघठन , सेवा समीतिया , कांग्रेस संघठन , विदेशो में भारतीय प्रतिनिधित्व , रचनात्मक कार्यक्षेत्र और राजनीतिक दांव पेंच सभी उनकी रूचि के विषय रहे है |

सुचेता कृपलानी (Sucheta Kriplani) का जन्म 25 जून 1908 में अम्बाला में हुआ था | प्रारम्भिक शिक्षा लाहौर में हुयी फिर M.A. दिल्ली विश्वविद्यालय से किया | राष्ट्रीयता और खादी क्र पारिवारिक परिवेश में पलकर स्वाधीन भारत के सपने वे बचपन से ही देखने लगी थी | बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में प्राध्यापिका के रूप में काम करते हुए भी उनकी भावनाए देश सेवा के लिए उद्वेलित हो रही थी | फिर सन 1932 में सार्वजनिक क्षेत्र में और सन 1939 से राजनीति में कूद पड़ी |

बाढ़ पीडितो की सेवा , भूकम्प पीडितो के लिए राहत कार्य , फिर विभाजन के बाद शरणार्थी पुनर्वास , महिला संस्थाए , कांग्रेस संघठन , श्रमिक संघ सभी उनके कार्यक्षेत्र बनते गये | सन 1939 तक उन्होंने सामने न आकर गुप्त रूप से कार्य किया , फिर कांग्रेस में शामिल हो स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने लगी | सन 1940 एवं 1944 में दो बार जेल भी गयी | सन 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन के समय अग्रणी युवा उत्साही कार्यकताओ में उनका नाम लिया जाता था | कुछ समय भूमिगत रहकर उन्होंने कांग्रेस सेवा दल और महिला कार्यकर्ता टोलियों के प्रशिक्षण का भार सम्भाला , फिर गिरफ्तार कर जेल भेज दी गयी | जेल से छूटने के बाद तो वे कभी जनता की आँखों से ओझल हुयी ही नही |

सन 1941-42 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में महिला विभाग में , विदेश विभाग में , मंत्री पद पर 1945 में कस्तूरबा ट्रस्ट के संगठन मंत्री पद पर उनकी नियुक्ती हुयी | सन 1949 में संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा अधिवेशन में भारतीय प्रतिनिधि मंडल की सदस्या थी तो 1954 में टर्की भेजे गये संसदीय प्रतिनिधि मंडल की और 1961 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संघठन के सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधि मंडल में थी | इसी तरह सन 1956 में राष्ट्र संघ द्वारा आयोजित “एशियाई महिलाओं की नागरिक जिम्मेदारियाँ” सम्मेलन में भारतीय महिलाओं का प्रतिनिधित्व भी उन्होंने ही किया था क्योंकि तब तक महिलाओं के रचनात्मक क्षेत्र में वे काफी काम कर चुकी थी |

सन 1946 में केन्द्रीय संविधान सभा की सदस्या रहने के बाद 1950-52 में संसद की अस्थायी सदस्य रही | कांग्रेस कार्यकारिणी में उन्होंने सन 1948-51 में सदस्यता के नाते तथा 1958-60 में महामंत्री के नाते काम किया | बीच में सन 1951 में कांग्रेस से त्याग पत्र देकर वे किसान-मजदूर प्रजा पार्टी में शामिल हो गयी थी और 1952 एवं 1957 के चुनावों में लोकसभा के लिए प्रजा समाजवादी पार्टी से ही निर्वाचित हुयी थी | इसके बाद पुन” कांग्रेस में शामिल हो सन 1962 एवं 1967 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर लोकसभा में आयी |

आचार्य जे.बी.कृपलानी जैसे असहिष्णु जन-नेता से विवाह करने के कारण तथा आपसी राजनीतिक मतभेदों के कारण अक्सर लोगो को भ्रम होता था कि सुचेता जी का वैवाहिक जीवन सुखी नही होगा लेकिन ये उनका भ्रम था | सुचेता (Sucheta Kriplani) आचार्य जी के स्वभाव झेलने के साथ उनकी सुख सुविधा का पूरा ध्यान रखती थी तथा आचार्य कृपलानी सुचेता के व्यक्तित्व को स्वत: विकसित होने देने के लिए पुरे अवसर प्रदान करते थे | उनका पारिवारिक दाम्पत्य जीवन अत्यंत आनंदी किस्म का रहा जो उन्हें अलग अलग क्षेत्रो में कार्य करने के लिए प्रेरणा एवं शक्ति प्रदान करता था |

एक पुरानी तपोनिष्ट कार्यकर्त्री के नाते ही उनके मुख्यमंत्री काल में अपनी शिकायत लेकर उनसे भेंट करने वाले नागरिको में 60 प्रतिशत संख्या महिलाओ की होती थी | वे अधिकतर अपनी निजी समस्याए लेकर उनके पास फरियाद करने पहुच जाती थी | कई बार सुचेता जी उनके समझा-बुझाकर भेज देती तो कई बार अपने अधिकार का प्रयोग कर उनकी सहायता भी करती | यदि सुचेता जी (Sucheta Kriplani) मुख्यमंत्री बनने से पूर्व एक लोकप्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में विख्यात न होती तो ऐसी नितांत व्यक्तिगत समस्याए लेकर नागरिक महिलाये उनके पास नही जा सकती थी |

01 दिसम्बर 1974 में 67 वर्ष की आयु में श्रीमती सुचेता कृपलानी (Sucheta Kriplani) का निधन हो गया | अपने अंतिम काल में कांग्रेस से निराश हो जनता पार्टी में शामिल हो गयी थी पर राजनीति अन उन्हें विशेष रास नही आती थी | मुख्यमंत्री पद के दायित्व से मुक्त होने के बाद वे अपना ध्यान सामजिक संस्थाओं में ही अधिक लगा रही थी | राजधानी में “लोक कल्याण समीति” जैसी  उपयोगी संस्थाए उन्ही की देन   है |

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