Swami Chinmayananda Biography in Hindi | आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिन्मयानन्द की जीवनी

Swami Chinmayananda Biography in Hindi | आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिन्मयानन्द की जीवनीस्वामी चिन्मयानन्द जी (Swami Chinmayananda) भारत के महान आध्यात्मिक संतो में से है | उनका भगवतगीता एवं उपनिषदों के ज्ञान पर असाधारण अधिकार था | वे  चिन्मयानन्द मिशन के संस्थापक थे और धर्म एवं दार्शनिक चिन्तन पर आधारित पुस्तको के लेखक भी | उन्होंने लगभग 30 पुस्तको की रचना की |

स्वामी चिन्मयानन्द  (Swami Chinmayananda) का जन्म 1916 में केरल के एर्नाकुलम जिले में हुआ | वहा उन्हें बालकृष्ण मेनन के रूप में जाना जाता था | लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि लेने के बाद वो पत्रकारिता के क्षेत्र में आये | स्वामी चिन्मयानन्द  इस माध्यम से राजनीति ,आर्थिक एवं समाज सुधार के आंदोलनों को प्रभावित करना चाहते थे | ऋषिकेश में उनकी भेंट स्वामी शिवानन्द जी से हुयी और वही से उनके जीवन की दिशा बदल गयी |

बालकृष्ण ने सन्यास ले लिया और वे स्वामी चिन्मयानन्द (Swami Chinmayananda) कहलाने लगे | गुरु ने उन्हें स्वामी तपोवन महाराज के पास शिक्षा पाने के लिए हिमालय भेज दिया | वहा आठ साल तक ज्ञान पाने के बाद स्वामीजी ने जनकल्याण का व्रत लिया | वो चालीस वर्षो तक निरंतर दुसरो की सेवा में लगे रहे | उन्होंने अनेक आश्रम ,स्कूल ,अस्पताल नर्सिंग होम एवं क्लिनिक खोले |

वर्ष 1993 में उन्हें हिन्दू होस्ट कमेटी द्वारा “हिन्दू रिलिजन अध्यक्ष” चुना गया | उन्हें शिकागो के पार्लियामेंटरी ऑफ़ वर्ल्ड डिवीज़न में यह सम्मान दिया गया | उन्हें वर्ल्ड विज़न 2000 के सम्मेलन भी सम्मानित किया गया | 3 अगस्त 1993 को कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में उनकी आत्मा परमात्मा में लीन हो गयी | उन्होंने वेदान्त का परिचय देने के लिए चिन्मयानन्द मिशन की स्थापना की थी | यह मिशन आध्यात्मिक उन्नति एवं संतोष प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है |

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