Talat Mahmood Biography in Hindi | गजल सम्राट तलत महमूद की जीवनी

Talat Mahmood Biography in Hindi | गायक तलत महमूद की जीवनी

Talat Mahmood Biography in Hindi | गायक तलत महमूद की जीवनी

शंशाह-ए-गजल तलत महमूद (Talat Mahmood )वो गायक है जिनका जादू 20वी सदी के चौथे दशक के आरम्भ में लोगो के सर चढकर बोला था | तलत महमूद का जन्म 24 फरवरी 1924 को लखनऊ एक एक शिक्षित ,सुसंस्कृत परिवार में हुआ था | जब वह कलकत्ता आये तो उनके आदर्श थे स्वर सम्राट कुंदनलाल सहगल , जिन्हें देवता की भांति पूजते थे | अपने इसी आदर्श नायक का अनुसरण करते हुए युवा तलत भी गायन तथा अभिनय की इस मायावी सृष्टि में प्रवेश का इच्छुक थे किन्तु उन दिनों भी रजत पट की इस मोहक दुनिया में प्रवेश पाना और सफल होना आसान नही था |

कुछ दिनों तक उन्होंने New Theaters में वेतन लेकर काम किया | New Theaters से जुडी संगीत की जानी-मानी हस्तियाँ रायचन्द बोराल , तिमिर बरन , पंकज मलिक तथा कमल दास गुप्ता ने तलत की सुप्त प्रतिभा को पहचाना किन्तु उन्हें सर्वाधिक प्रोत्साहन मिला संगीतकार अनिल बिस्वास से , जिनकी आंखे तलत महमूद के निधन पर उस महान गायक को श्रुधांजलि अर्पित करते हुए अश्रुसिक्त हो गयी थी | कलकत्ता में रहते हुए तलत ने कुछ गैर-फ़िल्मी गीत रिकॉर्ड करवाए , जिन्हें शीघ्र लोकप्रियता मिल गयी | इनमे से कुछ थे “सोये हुए है चाँद और तारे” “आज की रात अंधियारी” “सब दिन एक समान नही” “तस्वीर तेरी मेरा दिल बहला न सकेगी” “जाने को है बहार” आदि |

तलत (Talat Mahmood )की प्रतिभा और गायकी को पहचानकर उसे शीर्ष तक ले जाने का श्रेय संगीत निर्देशक अनिल बिस्वास को ही है | 1949 में जब तलत फिल्म नगरी बम्बई में आये तो एक पार्श्वगायक के रूप में स्वयं को स्थापित करना उनका लक्ष्य था | यहाँ खेमचंद प्रकाश की नजर उनकी ओर गयी और उन्होंने तलत से राजकपूर-नरगिस अभिनीत फिल्म “जान-पहचान” में प्रसिद्ध गायिका गीता दत्त के साथ एक युगल गीत गवाया “अरमान भरे दिल की लगन तेरे लिए है ” | यह गीत लोकप्रियता की सर्वोच्च सीढ़ी पर पहुचा |

1949 में ही दिलीप कुमार और कामिनी कौशल अभिनीत “आरजू” में अनिल बिस्वास ने तलत से वियोगजन्य अवसाद भरा एक अन्य गीत गवाया “ए दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहा कोई न हो”| जीवन से पलायन का यह स्वर तत्कालीन छायावादी हिंदी काव्य में भी मुखर हो रहा था “ले चल मुझे भुलावा देकर नाविक धीरे धीरे” और विरह से उत्पन्न पलायन के ऐसे ही स्वर फ़िल्मी गीतों में गूंज रहे थे | निश्चय ही तलत की कोमल रेशमी आवाज का जादू श्रोताओं पर असर कर रहा था |

तलत (Talat Mahmood) की स्मृतियों को पुनर्जीवित करते हुए अनिल बिस्वास याद करते है कि उस समय उनकी आवाज में जो एक प्रकार का कम्पन था उसे नियंत्रित करते हुए तलत का स्वर असहज हो उठा | मैंने उन्हें अपनी आवाज स्वाभविक रखने के लिए कहा और वह मेरे निर्देश को समझ गये | आरजू की सफलता से तलत में अपूर्व आत्मविश्वास पैदा हुआ और फिर वह सफलता की सीढ़िया चढ़ते गये | अनिल बिस्वास के निर्देशन में तलत ने अनेक प्रसिद्ध और लोकप्रिय गीत गाये “शुक्रिया ए प्यार तेरा शुक्रिया” “एक मै हु एक मेरी बेकसी की शाम है ” “तेरा ख्याल दिल से मिटाया नही अभी” “राही मतवाले तू छेड़ एक बार” |

20वी सदी का पांचवा दशक तलत (Talat Mahmood) के फिल्म गायन का स्वर्ण युग था | अनिल बिस्वास के अतिरिक्त जिन अन्य निर्देशकों ने उनकी रेशम सी महीन कोमल आवाज को रुपहले पर्दे पर प्रस्तुत किया वो थे सी.रामचन्द्र , नौशाद , मदनमोहन , सचिनदेव बर्मन , शंकर जयकिशन , हुस्नलाल भगतराम, गुलाम मोहम्मद , रोशन और बुलो सी रानी | निश्चय ही तलत की प्रतिभा संगीत के लिए ही थी | अभिनेता बनने की ललक उनमे प्रबल थी और वह सैगल की भांति गायन और अभिनय दोनों क्षेत्रो में कामयाब होना चाहते थे किन्तु उनकी असफलता का कारण भी यही बना |

कारदार की फिल्म “दिले नादान” में उन्हें नायक की भूमिका मिली | यहाँ नारी भूमिकाओं में अभिनेत्री श्यामा और एक नई लडकी पीस कंवल थी } संगीत निर्देशक गुलाम मोहम्मद ने तलत से कई मधुर गीत गवाए “जिन्दगी देने वाले सुन” “ओ खुशी से चोट खाए वो जिगर कहा से लाऊ” तथा “ये रात सुहानी” | दिलेनादान का संगीत पक्ष तो उत्कृष्ट था किन्तु वह बॉक्स ऑफिस पर पिट गयी | उन्होंने अन्य फिल्मो में भी काम किया “सोने की चिड़िया” “एक गावं की कहानी “”मालिक” और “”वारिस” में | ये सभी फिल्मे असफल रही किन्तु इनके गाने लोकप्रिय हुए |

तलत (Talat Mahmood) के अभिनय में अधिक रूचि लेने के कारण संगीत निर्देशकों ने उनकी उपेक्षा करनी आरम्भ की और पार्श्व गायकों की तिकड़ी रफी ,मुकेश और किशोर की भांति तलत अपना व्यापक प्रभाव नही छोड़ सके | लेकिन संगीतकार मदनमोहन ने तलत को तब भी निराश नही किया | उनके साथ तलत के समीकरण सफल और प्रभावी रहे | फिल्म मदहोश में तलत ने गाया “मेरी याद में तुम ना आंसू बहाना” और इसी भाँती उनके कुछ अन्य सफल गीतों का निर्देशन मदनमोहन ने किया |

निश्चय ही अभिनय में तलत (Talat Mahmood )को विशेष सफलता नही मिली यद्यपि माला सिन्हा और नूतन जैसी नायिकाओं के साथ काम किया था | उल्लेखनीय है कि तलत को सर्वाधिक सफलता गजल के क्षेत्र में मिली और इस फन में उनका कोई सानी नही है | 1992 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया | 9 मई 1998 को 74 वर्ष की उम्र में मुम्बई में तलत महमूद का निधन हो गया | निश्चय ही तलत के निधन से निगूढ़ ,पीड़ा वेदना ,अवसाद और वियोग जैसी कोमल अनुभूतियो को अभिव्यक्ति देने वाला कलाकार उठ गया |

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