Tulsidas Biography in Hindi | गोस्वामी तुलसीदास की जीवनी

Tulsidas Biography in Hindi

Tulsidas Biography in Hindi

“रामचरितमानस” जैसे विश्वविख्यात ग्रन्थ के रचियता और रामभक्त संत कवि गोस्वामी तुलसीदास (Tulsidas) के आरम्भिक जीवन के संबध में प्रमाणिक जानकारी का बहुत अभाव है | अधिकतर विद्वान उनका जन्म संवत 1589 में बांदा (उत्तर प्रदेश) राजापुर मानते है | एक मत उनका जन्मस्थान इटावा (उत्तर प्रदेश) के सोरो स्थान को भी मानता है | इनका बचपन का नाम रामबोला था | तुलसीदास (Tulsidas) का बचपन कष्ट में बीता | कहते है अशुभ लग्न में जन्म के कारण पिता ने शिशु को त्याग दिया था |

चुनिया नामक दासी ने उन्हें पाला , पर जब वे पांच वर्ष के थे तभी वह भी मर गयी | अब भीख मांगकर दिन काटने के अतिरिक्त कोई मार्ग न रह गया | एक हनुमान मन्दिर में आश्रय लिया और भिक्षा मांगने लगे | इसी बीच नरहरि शास्त्री के विद्वान की तुलसी पर दृष्टि पड़ी | उन्होंने अयोध्या ले जाकर यज्ञोपवीत किया और शिक्षा आरम्भ कराई | बाद में तुलसीदास जी (Tulsidas) ने काशी में शेष सनातन जी के साथ रहकर 15 वर्षो तक वेद-पुराणों का अध्ययन किया |

रामकथा तो तुलसीदास जी (Tulsidas) अपने गुरु नरहरि से बचपन में ही सुन चुके थे | वैराग्य के संस्कार और रामभक्ति की भावना उनके अंदर जागृत हो गयी थी | फिर भी उन्होंने कुछ समय के लिए गृहस्थाश्रम में प्रवेश किया | उनकी पत्नी का नाम रत्नावली था | प्रचलित कथा के अनुसार पत्नी के अपने मातृगृह चले जाने पर तुलसीदास बरसात की रात में नदी पार करते भीगते हुए ससुराल जा पहुचे | इस पर रत्नावली ने शर्म और झुंझलाहट से कह दिया कि मेरी हांड-मॉस की देह के स्थान पर भगवान राम से प्रीति क्यों नही करते ? बात तुलसी को लग गयी और वे सब कुछ त्यागकर राम-भजन करते हुए तीर्थो की यात्रा पर निकल गये |

मान्यता है कि तुलसीदास (Tulsidas) ने पहले संस्कृत में काव्य-रचना आरम्भ की थी पर उसकी पहुच जनसाधारण तक न होने के कारण वे जन-भाषा में रचना करने लगे | “रामचरितमानस” की रचना उन्होंने संवत 1631 में अयोध्या में आरम्भ की थी | किष्किन्धा काण्ड काशी में पूरा हुआ | अनेक तीर्थो में घूमते हुए भी अपने जीवन के अंतिम समय उन्होंने काशी में बिताया | उनका काशी का स्थान अब “तुलसीघाट” के नाम से प्रसिद्ध है | यहा पर उनकी ही स्थापित की हुयी हनुमान जी की प्रतिमा है |

काशी के ब्राह्मण-सम्प्रदाय ने उनका विरोध भी किया था पर अपने नम्र स्वभाव से वे अविचल रहे | तुलसीदास रचित 39 ग्रन्थ बताये जाते है किन्तु इन 12 ग्रंथो को लोग निश्चित रूप से उनका रचा हुआ मानते है १ रामलला नछ्हू  २ रामज्ञा प्रश्न ३ जानकी मंगल ४ रामचरितमानस ५ पार्वती मंगल ६ गीतावली ७ कृष्ण गीतावली ८ विनय पत्रिका ९ बरवै रामायण १० दोहावली ११ कवितावली और १२ हनुमान बाहुक | रामचरितमानस तुलसीदास की प्रतिनिधि रचना है |

तुलसीदास (Tulsidas) के समय देश में अकबर का शासन था | हिन्दू धर्म जिस संकट की स्थिति से गुजर रहा था उसमे रामचरितमानस ने नये जीवन का संचार किया | झोपडी से लेकर महल तक प्रत्येक हिन्दू के घर में प्रतिष्टित यह ग्रन्थ सात कांडो में विभक्त है जिनके नाम है बालकाण्ड , अयोध्या काण्ड , अरण्य काण्ड , किष्किन्धाकाण्ड , लंकाकांड , और उत्तर कांड | कवि भक्त , आदर्शवादी और राष्ट्र नायक तुलसीदास जी (Tulsidas) का निधन संवत 1680 में वाराणासी में हुआ था |

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