गोस्वामी तुलसीदास की जीवनी | Tulsidas Biography in Hindi

0
179
गोस्वामी तुलसीदास की जीवनी | Tulsidas Biography in Hindi
गोस्वामी तुलसीदास की जीवनी | Tulsidas Biography in Hindi

“रामचरितमानस” जैसे विश्वविख्यात ग्रन्थ के रचियता और रामभक्त संत कवि गोस्वामी तुलसीदास (Tulsidas) के आरम्भिक जीवन के संबध में प्रमाणिक जानकारी का बहुत अभाव है | अधिकतर विद्वान उनका जन्म संवत 1589 में बांदा (उत्तर प्रदेश) राजापुर मानते है | एक मत उनका जन्मस्थान इटावा (उत्तर प्रदेश) के सोरो स्थान को भी मानता है | इनका बचपन का नाम रामबोला था | तुलसीदास (Tulsidas) का बचपन कष्ट में बीता | कहते है अशुभ लग्न में जन्म के कारण पिता ने शिशु को त्याग दिया था |

चुनिया नामक दासी ने उन्हें पाला , पर जब वे पांच वर्ष के थे तभी वह भी मर गयी | अब भीख मांगकर दिन काटने के अतिरिक्त कोई मार्ग न रह गया | एक हनुमान मन्दिर में आश्रय लिया और भिक्षा मांगने लगे | इसी बीच नरहरि शास्त्री के विद्वान की तुलसी पर दृष्टि पड़ी | उन्होंने अयोध्या ले जाकर यज्ञोपवीत किया और शिक्षा आरम्भ कराई | बाद में तुलसीदास जी (Tulsidas) ने काशी में शेष सनातन जी के साथ रहकर 15 वर्षो तक वेद-पुराणों का अध्ययन किया |

रामकथा तो तुलसीदास जी (Tulsidas) अपने गुरु नरहरि से बचपन में ही सुन चुके थे | वैराग्य के संस्कार और रामभक्ति की भावना उनके अंदर जागृत हो गयी थी | फिर भी उन्होंने कुछ समय के लिए गृहस्थाश्रम में प्रवेश किया | उनकी पत्नी का नाम रत्नावली था | प्रचलित कथा के अनुसार पत्नी के अपने मातृगृह चले जाने पर तुलसीदास बरसात की रात में नदी पार करते भीगते हुए ससुराल जा पहुचे | इस पर रत्नावली ने शर्म और झुंझलाहट से कह दिया कि मेरी हांड-मॉस की देह के स्थान पर भगवान राम से प्रीति क्यों नही करते ? बात तुलसी को लग गयी और वे सब कुछ त्यागकर राम-भजन करते हुए तीर्थो की यात्रा पर निकल गये |

मान्यता है कि तुलसीदास (Tulsidas) ने पहले संस्कृत में काव्य-रचना आरम्भ की थी पर उसकी पहुच जनसाधारण तक न होने के कारण वे जन-भाषा में रचना करने लगे | “रामचरितमानस” की रचना उन्होंने संवत 1631 में अयोध्या में आरम्भ की थी | किष्किन्धा काण्ड काशी में पूरा हुआ | अनेक तीर्थो में घूमते हुए भी अपने जीवन के अंतिम समय उन्होंने काशी में बिताया | उनका काशी का स्थान अब “तुलसीघाट” के नाम से प्रसिद्ध है | यहा पर उनकी ही स्थापित की हुयी हनुमान जी की प्रतिमा है |

काशी के ब्राह्मण-सम्प्रदाय ने उनका विरोध भी किया था पर अपने नम्र स्वभाव से वे अविचल रहे | तुलसीदास रचित 39 ग्रन्थ बताये जाते है किन्तु इन 12 ग्रंथो को लोग निश्चित रूप से उनका रचा हुआ मानते है १ रामलला नछ्हू  २ रामज्ञा प्रश्न ३ जानकी मंगल ४ रामचरितमानस ५ पार्वती मंगल ६ गीतावली ७ कृष्ण गीतावली ८ विनय पत्रिका ९ बरवै रामायण १० दोहावली ११ कवितावली और १२ हनुमान बाहुक | रामचरितमानस तुलसीदास की प्रतिनिधि रचना है |

तुलसीदास (Tulsidas) के समय देश में अकबर का शासन था | हिन्दू धर्म जिस संकट की स्थिति से गुजर रहा था उसमे रामचरितमानस ने नये जीवन का संचार किया | झोपडी से लेकर महल तक प्रत्येक हिन्दू के घर में प्रतिष्टित यह ग्रन्थ सात कांडो में विभक्त है जिनके नाम है बालकाण्ड , अयोध्या काण्ड , अरण्य काण्ड , किष्किन्धाकाण्ड , लंकाकांड , और उत्तर कांड | कवि भक्त , आदर्शवादी और राष्ट्र नायक तुलसीदास जी (Tulsidas) का निधन संवत 1680 में वाराणासी में हुआ था |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here