Tun Tun Uma Devi Biography in Hindi | हास्य अभिनेत्री टुनटुन उर्फ़ उमा देवी की जीवनी

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Tun Tun Uma Devi Biography in Hindi
Tun Tun Uma Devi Biography in Hindi

उनके बढ़ते वजन के साथ सामजिक परिहास हमेशा जुड़ा रहा है लेकिन फ़िल्मी पर्दे पर उमा देवी उर्फ़ टुनटुन (Tun Tun) ने जिस तरह बढ़ते वजन और कॉमिक सेंस का इस्तेमाल किया वह आज भी लाजवाब है | टुनटुन (Tun Tun) ने भले ही फ़िल्मी करियर की शुरुवात गायिका के तौर पर की थी लेकिन उनकी असल पहचान आज भी फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला कॉमेडियन के तौर पर है | उनके पहले ही गीत “अफसाना लिख रही हु ” ने कामयाबी की तमाम बुलंदिया छुई | बमुश्किल 40-45 गीत गाने के बाद वह घरेलू वजहों से फिल्म उद्योग से अलग हुयी और कुछ समय बाद वापसी करते हुए दुसरी पारी में उन्होंने दर्शको के दिलो में कॉमेडियन के तौर पर अमिट छवि बनाने में सफलता पायी | इस दौरान उन्होंने करीब 200 से अधिक फिल्मो में अभिनय किया |

हालांकि पर्दे पर हमेशा हंसने और हंसाने वाली टुनटुन (Tun Tun) की असल जिन्दगी में हंसी से ज्यादा दर्द के किस्से जुड़े थे | कम उम्र में माँ-बाप का साया सिर से उठ जाना और गरीबी को करीब से देखना ,देश का विभाजन और फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष उन्हें जिन्दगी के हर रंग से वाकिफ की नही कराया वरन उन्हें झुझारू और कर्तव्यपरायण महिला होने का एहसास कराया | शायद यही वजह थी कि इतनी बड़ी शख्सियत होने के बावजूद उन्होंने सारी उम्र हकीकत से कभी मुंह नही फेरा | अपनी असल जिन्दगी में भी टुनटुन बेहद विनम्र तथा हंसमुख स्वभाव की स्वामिनी थी जिनकी उपस्थिति हर जगह गर्मजोशी भर देती थी |

11 जुलाई 1923 को उनका जन्म उत्तर प्रदेश के एक दूर दराज के गाँव में हुआ था | उनका नाम उमा देवी (Uma Devi) रखा गया परन्तु कम उम्र में माता-पिता खो देने के बाद उनकी परवरिश उनके अन्य संबधियो ने की लेकिन जिस चीज ने उन्हें हमेशा व्यस्त रखा , वह था उनका गाने का शौक | हालांकि कमजोर पारिवारिक स्थिति के चलते उन्हें संगीत की किसी तरह की विधिवत शिक्षा नही मिली , बावजूद इसके उन्होंने कभी भी स्वरों को कमजोर नही पड़ने दिया | इसी बीच उनकी मुलाक़ात दिल्ली के एक्साइज विभाग में इंस्पेक्टर अख्तर अब्बाज काजी से हुयी | उन्होंने उन्हें सहारा दिया और उनका आत्मविश्वास बढ़ाया लेकिन देश के बंटवारे के बाद काजी साहब लाहौर चले गये |

इधर हालात से तंग आकर फिल्मो में गाने का ख़्वाब लिए उमा देवी (Uma Devi) चुपचाप बम्बई भाग आई | उधर काजी साहब का मन लाहौर ने नही लगा इसलिए मौका पाते ही वह भी बम्बई चले आये एयर फिर दोनों ने शादी कर ली | उन्होंने फिम इंडस्ट्री में संगीतकार नौशाद के नेतृत्व में गायिका के तौर पर करियर की शुरुवात की थी | गायिकी में बुलन्दियो को छूने के बाद जल्द ही घरेलू कारणों के चलते फिल्म उद्योग से अलग होना पड़ा | इस दौरान उन्होंने करीब 40 से 45 गीतों को अपनी सुरीली आवाज दी |

उनकी आवाज में के गजब की कशिश थी जो उस दौर के दर्शको में खासी लोकप्रिय हुयी थी परन्तु घर के बिगड़ते हालात और पैसे की मजबूरी के चलते टुनटुन (Tun Tun) ने इंडस्ट्री में वापसी की | हालांकि इस बार चमक-दमक भरी यह दुनिया उनके लिए बिलकुल बदल चुकी थी | प्लेबैक का परिदृश्य बदल चूका था | यह वह दौर था जब लता मंगेशकर , आशा भोंसले ,नूरजहाँ और शमशाद बेगम जैसे गायिकाये थी | परिवार के पालन-पोषण के लिए उन्हें मजबूरन गायिका उमा खत्री से अभिनेत्री टुनटुन बनना पड़ा | असल में दुसरी पारी में उमा का वजन बढ़ चूका था जिसका असर उनकी गायिकी पर भी हुआ | संगीतकार नौशाद के कहने पर उन्होंने अभिनेत्री बनना स्वीकार किया और उन्हें नया नाम “टुनटुन ” दिया |

नौशाद ने उन्हें अपनी पहली होम प्रोडक्शन फिल्म “बाबुल” में अभिनेत्री के तौर पर अवसर दिया था | उनकी लोकप्रियता का आलम ऐसा था कि उस दौर में वह हर दुसरी-तीसरी फिल्म में होती थी भले ही उनकी भूमिका छोटी ही क्यों न हो | वह असल जिन्दगी में भी उतनी ही मस्तमौला थी जितनी फ़िल्मी पर्दे पर नजर आती थी |बतौर अभिनेत्री उन्होंने “उडन खटोला” “बाज” “आर-पार” “मिस कोका कोला” “मिस्टर एंड मिसेज 55” “राजहठ ” “बेगुनाह” “उजाला” “कोहिनूर” “12 ओ क्लॉक” “दिल अपना प्रीत पराई” “कभी अँधेरा कभी उजाला” “मुजरिम ” “जाली नोट” “एक फुल चार कांटे” “कश्मीर की कली” “अक्लमंद” “दिल और मोहब्बत” “CID” “एक बार मुस्कुरा दो” और “अंदाज” जैसी फिल्मे की | आखिरी बार “कुर्बानी” और “नमकहलाल” जैसी फिल्मे करने के बाद खुद अभिनय से उन्होंने दूर कर लिया और 24 नवम्बर 2003 को मुम्बई में उनका निधन हो गया था |

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