विश्वनाथ प्रताप सिंह की जीवनी | V.P.Singh Biography in Hindi

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विश्वनाथ प्रताप सिंह की जीवनी | V.P.Singh Biography in Hindi
विश्वनाथ प्रताप सिंह की जीवनी | V.P.Singh Biography in Hindi

विश्वनाथ प्रताप सिंह (V.P.Singh) का जन्म 25 जून 1931 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था | वी.पी.सिंह उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे है | इस दौरान उन्होंने डाकुओ के सफाए का अभियान चलाया जो ख़ासा चर्चा में रहा और बतौर प्रधानमंत्री इन्होने मंडल कमीशन की सिफ़ारिशो को लागू करने का अनूठा कम किया जिसने इस देश की दशा और दिशा दोनों परिवर्तित कर दी |

1984 में इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने वी.पी.सिंह (V.P.Singh )को रक्षामंत्री बनाया | इसी दौरान बोफोर्स तोप सौदे में कमीशन खाने की खबरे आने लगी | इससे राजीव गांधी की मिस्टर क्लीन छवि धूमिल होने लगी तो उन्होंने वी.पी.सिंह को रक्षा मंत्री के पद से हटा दिया | इस विवाद में वी.पी.सिंह धर्मयोद्धा के रूप में उभरे | उन्होंने हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवीलाल के साथ मिलकर देश का दौरा किया और विपक्षी दलों के साथ मिलकर जनता दल का गठन किया जिसे चुनाव में अच्छा बहुमत मिला |

वी.पी.सिंह (V.P.Singh) 2 दिसम्बर 1989 को भारत के प्रधानमंत्री चुने गये | प्रधानमंत्री के रूप में उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी कि उन्होंने मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागु करके पिछडो को आरक्षण प्रदान किया और एक तरह से देश की राजनीति का नक्शा बदल दिया | इसके बाद ही राजनीति में पिछड़ी जातियों का उभार देखने को मिला | समाजवादी चिंतक राममनोहर लोहिया भी सौ में से साठ स्थान पिछडो को देने की बात करते थे | मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू करके इस विचार को वी.पी.सिंह ने ही अमली जामा पहनाया | यद्यपि देश का एक बड़ा वर्ग आरक्षण व्यवस्था को ओर पेचीदा बना देने से उनसे नाराज भी रहा है |

यह वह दौर था जब देश में मंडल और कमंडल की राजनीती में चर्चा थी | इसमें मंडल शब्द वी.पी.सिंह सरकार की आरक्षण की राजनीती के लिए इस्तेमाल किया जाता था जबकि कमंडल भाजपा की हिंदूवादी राजनीति के लिए | हुआ यह कि जनता पार्टी की सरकार ने 1977-79 में धनिकलाल मंडल की अध्यक्षता में एक कमीशन नियुक्त किया था उसकी अनुश्न्शाये लागू हो , इसके पहले ही जनता पार्टी की सरकार बिखर गयी | फिर श्रीमती इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी  | उन्होंने इस प्रस्ताव को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया | जनता दल की सरकार बनने से वी.पी ,सिंह ने मंडल कमीशन की उस पुरानी रिपोर्ट पर से धुल झाडी और 07 अगस्त 1990 को संसद में पेश किया |

इस रिपोर्ट के अनुसार सरकारी सेवाओं और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में पिछड़ी जातियों के लिए 27 फीसदी आरक्षण की व्ववस्था की गयी | पहले से ही 22.5 प्रतिशत आरक्षण अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियो को दिया हुआ था | अब पिछड़े वर्ग को भी आरक्षण देने से यह बढकर 49.5 फीसदी हो गया | इस रिपोर्ट के पेश होने के बाद पुरे देश में इसकी व्यापक प्रतिक्रिया हुयी | आन्दोलन ,जुलुस एवं तोड़फोड़ की बात तो अलग छात्रों ने आत्मदाह तक किया | वी.पी.सिंह के खिलाफ ऐसा जबर्दस्त माहौल बना जो भारत के राजनितिक इतिहास में इससे पहले कभी नही देखा गया | 05 नवम्बर को जनता दल का विभाजन हो गया और 10 नवम्बर 1990 को वी.पी.सिंह ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया |

1991 से वी.पी.सिंह (V.P.Singh) ने सक्रिय राजनीति में भाग लेना बंद कर दिया और सामजिक मुद्दों की बात पर पुरे देश का भ्रमण किया | 1998 में वी.पी.सिंह को कैंसर हो गया और उन्होंने सार्वजनिक रूप से बाहर आना बंद कर दिया | 2003 में कैंसर का इलाज होने के बाद वो फिर से सार्वजनिक सभाओं में भाग लेने लगे | 27 नवम्बर 2008 को काफी लम्बी बीमारी के बाद किडनी फेल हो जाने की वजह से उनका देहांत हो गया | अलहाबाद में गंगा किनारे उनका अंतिम संस्कार किया गया | उनके दो पुत्र अजयसिंह और अभयसिंह है जिसमे अजयसिंह राजनीति में जबकि अभयसिंह एम्स दिल्ली में डॉक्टर है |

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