Vagbhata Biography in Hindi | आयुर्विज्ञानी वाग्भट्ट की जीवनी

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Vagbhata Biography in Hindi | आयुर्विज्ञानी वाग्भट्ट की जीवनी
Vagbhata Biography in Hindi | आयुर्विज्ञानी वाग्भट्ट की जीवनी

महान आयुर्विज्ञानी वाग्भट्ट (Vagbhata) प्राचीन आचार्यो में आचार्य आत्रेय , आचार्य सुश्रुत और आचार्य वाग्भट्ट , ये तीनो “वृद्धत्रयी” के नाम से विख्यात है | इन आचार्यो के ग्रन्थ वर्तमान में भी आयुर्वेद के अध्येताओ को ओर छात्रों को भी विषय की पाठ्य-पुस्तक के रूप में पढाये जाते है | अन्याय प्राचीन विद्वानों की ही भांति आचार्य वाग्भट्ट के भी जन्म काल आदि के विषय में कोई विस्तृत अथवा अधिकृत विवरण प्राप्त नही होता | इनका जन्म , ऐसा माना जाता है कि सिन्धु नदी के तटवर्ती किसी जनपद में हुआ था |

वाग्भट्ट (Vagbhata) का जन्म वैदिक काल में हुआ था यह भी उल्लेख पाया जाता है | वाग्भट्ट के जीवन पर बौद्ध धर्म का अत्यधिक प्रभाव पाया जाता है |  इससे यह तो सिद्ध है कि वे उत्तर बौद्धकालीन चिकित्सक रहे थे | उनके गुरु का नाम अवलोकिता कहा जाता है | अनेक स्थानों पर भगवान बुद्ध को अवलोकितेश्वर भी कहा गया है | “अष्टांग हृदय” और “अष्टांग हृदय संहिता” वाग्भट्ट के दो प्रसिद्ध आयुर्वेद ग्रन्थ आज भी पाठ्यपुस्तक के रूप में प्रयुक्त होते है | आज का वैध्य समाज भी इन ग्रंथो को अपनी चिकित्सा का आधार बनाते है |

“अष्टांग हृदय संहिता” ग्रन्थ के प्रथम भाग में उन्होंने प्राचीन औषधिया , अध्येताओ के लिए आवश्यक निर्देश , दैनिक एवं मौसम के अनुसार स्वास्थ्य निरीक्षण , रोगों की उत्पति , विभिन्न प्रकार के खाध्य पदार्थो के गुणदोष , विषैले खाध्य पदार्थो की पहचान और उनसे उत्पन्न रोगों का उपचार , व्यक्तिगत शुद्धता , औषधि और उनके विभाग का नाम आदि का वर्णन किया है | इस ग्रन्थ के द्वितीय भाग में उन्होंने मानव शरीर की रचना , शरीर के प्रमुख अंगो का विस्तार से वर्णन , मनुष्य के स्वभाग और उसके विभिन्न रूप और उसके आचरणों की व्याख्या की है |

ग्रन्थ के तृतीय भाग में अनेक रोग जैसे ज्वर ,मिर्गी , उल्टी , श्वास और चर्म रोग आदि आदि रोगों के कारण और उपचार की व्याख्या की है | चतुर्थ भाग में वमन और स्वच्छता तथा अंतिम पंचम भाग में बाल आचरण और रोगों से सम्बन्धित अन्याय विषयों एवं उपचार पर प्रकाश डाला गया है | तभी इस ग्रन्थ को आयुर्वेद का महत्वपूर्ण ग्रन्थ स्वीकार किया जाता है | इससे यह भी सिद्ध होता है कि उस युग में भारत का आयुर्विज्ञान अत्यंत उन्नत था और वाग्भट्ट भारत के महान आयुर्विज्ञानी थे | यही इनका संक्षिप्त विवरण उपलब्ध होता है |

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