Vasco Da Gama Biography in Hindi | वास्कोकिडामा की जीवनी

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Vasco Da Gama Biography in Hindi | वास्कोकिडामा की जीवनी
Vasco Da Gama Biography in Hindi | वास्कोकिडामा की जीवनी

वास्को-द-गामा (Vasco Da Gama)” खोज युग” का एक सबसे सफलतम पुर्तगाली नाविक था | यूरोप से उत्तम आशा अंतरीप का चक्कर लगाकर यूरोप से सीधे भारत पहुचने वाला वही पहला आदमी था | उसी ने गोवा में पुर्तगाली उपनिवेश की आधारशिला रखी | पुर्तगाल के अभिजात परिवार में डॉम वास्को-द-गामा का जन्म वर्ष 1460 में हुआ था | उसके पिता एस्टेवाओ भी एक अन्वेषक थे | नौवा परिवहन का काम वास्को-द-गामा ने नौसेना में रहकर सीखा , जिसे उसने अपने Career के रूप में अपनाया था | सन 1947 में उसे भारत के लिए एक सीधा मार्ग ढूंढने के लिए एक जहाज का कप्तान बनाया गया |

वास्को (Vasco Da Gama) की पहली खोज-यात्रा 8 जुलाई 1497 को आरम्भ हुयी | वह चार जहाजो के साथ रवाना हुआ | 200 टन वजनी सेंट गैबरियल नामक जहाज को वह खुद चला रहा था | उसका छोटा भाई पाउलो सेंट रोफेल नामक जहाज का नेतृत्व कर रहा था | वह अफ्रीका के दक्षिण छोर से उत्तम आशा अंतरीप (Cape of Good Home) जा चक्कर लगाते हुए धडकते मन से हिन्द महासागर में घुसा | यहाँ उसके ज्यादातर नाविक स्कर्वी रोग के शिकार हो गये |

वास्को (Vasco Da Gama )मोपीक में आराम और खाने-पीने के सामान भरने के लिए रुका | इसके बाद अगला विराम उसने मोम्बासा में लिया जहां से एक अनुभवी अरब नाविक अहमद इब्न माजिद को को उसने अपने साथ ले लिया | आखिर 28 मई 1498 को वह कालीकट के तट पर उतरा | कालीकट के शासक ने मसालों के व्यापार के लिए वास्को से समझौता किया और उसके सारे मसाले खरीद लिए | इससे अरब के मुस्लिम मसाला व्यापारियों को बहुत घाटा उठाना पड़ा और प्रतियोगिता बढ़ गयी |

तीन महीने भारत में बिताने के बाद वास्को द गामा के बेडो ने अगस्त में कालीकट छोड़ दिया | उन्हें मानसून की हिदायत दी गयी लेकिन उन्होंने परवाह नही की और फलत: उन्हें भारी झंझावतो का सामना करना पड़ा | पहले जो रास्ता तीन घंटो में तय किया गया था अब तीन से ज्यादा महीनों में तय हुआ | कई नाविक मारे गये | नाविकों की कमी के कारण सेंट राफेल जहाज को जलाकर नष्ट कर देना पड़ा | वास्को के भाई पाउलो की तबीयत बिगड़ गयी और उसने भी दम तोड़ दिया |

वास्को (Vasco Da Gama) की यह यात्रा बेहद घटनाक्रम वाली रही | उसके 170 से से 54 नाविक जीवित वापस लौटे पर पुर्तगाल में उसका भव्य स्वागत हुआ | उसे एडमिरल बना दिया गया | उसने एक अभिजात महिला कैटरिना द एटैद से शादी कर ली | सन 1502 में वह 20 सैन्य जहाजो के साथ फिर से भारत की ओर रवाना हुआ | दरअसल पुर्तगाली किंग मैनुएल भारत में अपना उपनिवेश बनाना चाहता था | मार्ग में वास्को ने सैकड़ो मुसलमान व्यापारियों को मौत के घाट उतार दिया था | कई व्यापरिक चुंगीयो को तोप से उड़वा दिया | यहाँ तक कि मक्का से लौटते एक जहाज के 180 हाजरीनो को भी नही बख्शा जिनमे महिलाये और बच्चे भी शामिल है |

कालीकट पहुचकर उसने बड़ा कत्लेआम किया , व्यापार चौकिया नष्ट कर दी , कालीकट के राजा को आत्मसमर्पण करना पड़ा | इसके बाद वह दक्षिण में कोच्ची पहुचा और वहा तक मसाले के व्यापार पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली | फरवरी 1503 में पुर्तगाल लौट गया और रस्ते माँ मोजाम्बिक में अपनी व्यापरिक चौकी बनाई | बाद में मोजाम्बिक पुर्तगाल का मजबूत उपनिवेश रहा | किंग मैनुएल की मृत्यु के बाद किंग जॉन तृतीय ने भारत में पुर्तगाली अधिकारियो के बढ़ते भ्रस्टाचार के दमन के लिए वास्को द गामा (Vasco Da Gama) से पुन: भारत जाने का आग्रह किया |

सन 1524 में वह तीसरी बार भारत रवाना हुआ – इस बार वायसराय के रूप में | लेकिन कोच्ची पहुचते ही 24 दिसम्बर 1524 को किसी अज्ञात बीमारी से उसका प्राणांत हो गया | कोच्चिन के एक चर्च में ही उसे दफना दिया गया | बाद में 1538 में उसके अवशेषों को पुर्तगाल में ले जाया गया | उसके सम्मान में गोवा के एक नगर का नाम वास्को-द-गामा रखा गया |

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