Arati Saha Biography in Hindi | आरती साहा की जीवनी

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Arati Saha Biography in Hindi

29 सितम्बर 1959 का दिन | कैम्प ग्रिसनेज के सामने का फ्रांसीसी तट | लहरों का निमन्त्रण पा एक तरुणी ने छपाक से उसमे प्रवेश किया और थोड़ी दूर पर चलती एक डोंगी के साथ अपनी लम्बी तैराकी यात्रा पर निकल पड़ी | एक घंटे तक मौसम साफ़ रहा , सागर शातं बना रहा और तैराक युवती मस्ती में झूमती हुयी आगे बढती रही | फिर हवा ने एकाएक तेजी पकड़ ली | लहरे मनचाहे ढंग से उसे झुलाने लगी | विपरीत हवा के थपेड़ो में घिरकर उसके लिए श्वास लेना कठिन होने लगा | उसने डोंगी में बैठे लोगो को सायास बताया कि तैर पाना कठिन होगा , उसे बहुत कष्ट हो रहा है | तभी एक चमत्कार हो गया | डोंगी में बैठे उसके मेनेजर ने एक मन्त्र हवा में उछाल दिया “करो या मरो” | बस फिर क्या था टूटता साहस लौट आया | अंग संचालन की गति में परिवर्तन कर वह फिर बढ़ चली |

चारो ओर अथाह जल  ही जल | कडाके की ठंड में उसकी हड्डी हड्डी टूटने लगी | डोंगी में बैठे लोगो को कम्बल ओढ़ देख उसे घर के अपने आरामदेह बिस्तर की याद हो आयी | उन्हें सैंडविच खाते देख उसे भूख अनुभव होने लगी | सुभ साढ़े पांच बजे वह जल में कूदी थी | अब शाम के सात बज रहे थे | अन्धकार बढ़ चला था | थकान और सर्दी के मारे बेहाल , अधीर और मरनोमुख कि फिर वही मन्त्र “करो या मरो” घबराओ मत जीत निश्चित है और भूख भाग गयी | ठंड के मारे खून जमा जा रहा था उसमे गर्मी आ गयी | लहरों के उपद्रव घातक न रहकर केवल शरारती बन गया , जिसकी शरारत से निबटना जरुरी था निहायत जरुरी | अंग संचालन की गति बदली और तैरने की गति बढ़ चली |

गति बढी तो किनारा भी आ गया | सामने खडी भीड़ हर्ष ध्वनि कर रही थी | तट पर पहुचकर नियमानुसार 9 गज चलना आवश्यक था | 16 घंटे 20 मिनट की कठिन यात्रा से तरुणी के हाथ पैरो में बुरी तरह खरोंचे लगी थी जिनमे खून टपक रहा था | समुद्र के खारे पानी में सूजकर जीभ दोगुनी मोटी हो गयी थी | अंग अंग टूट रहा था मगर लक्ष्य प्राप्ति की उमंग में सबकुछ खो गया | कुछ देर पहले स्वयं को खड़े होने में असमर्थ समझने वाली आकर खडी ही नही हो गयी , 9 गज आसानी से चली भी आयी | हर्ष ध्वनि से उसे लगा जैसे अभी वह उसी रास्ते तैरकर वापस भी जा सकती है | उसका चिर अभिलषित स्वप्न पूरा हुआ फिर थकावट कैसी !

साहस और संकल्प की जीत ! भारतीय नारी की महान विजय | भारत की , बंगाल की पुत्री ने इंग्लिश चैनल पार कर लिया था | दुसरे दिन सभी समाचार पत्रों में के नाम चमक उठा  -आरती साहा (Arati Saha ) |

आरती साहा (Arati Saha) का जन्म 24 सितम्बर 1940 को कोलकाता में एक बंगाली हिन्दू परिवार में हुआ था | उनके पिता पंचगोपाल साहा सेना में साधारण कर्मचारी थे | आरती साहा तब केवल चार वर्ष की थी कि चाचा उंगली पकडकर उसे हुगली नदी में तैरना सिखाने ले गये | माँ उसे दो वर्ष का छोडकर चल बसी थी | पिता ने लडको की तरह लाड-प्यार से पाला पोसा | चाचा एवं भाई ने बड़ी लगन से तैराकी के करतब सिखाये और पिता ने उसे बड़ी होकर इंग्लिश चैनल पार करने की प्रेरणा दी | वर्षो तक हुगली नदी में गोते लगा लगाकर उसकी चंचल लहरों से खेलती रही | फिर होश सम्भालते ही इंग्लिश चैनल की रट लगाने लगी |

इस महत्वकाक्षा के कारण इंग्लैंड जाने से पूर्व उसका दैनिक जीवन बहुत व्यस्त रहा | रोज सवेरे कॉलेज जाती , वही से सीधे स्विमिंग पुल | प्रतिदिन दो घंटे तैरने का अभ्यास करती , फिर शीघ्रता से भोजन आदि निबटाकर दक्षिण-पूर्व रेलवे के कार्यालय में अपने काम पर हाजिर होती | शाम को घर लौटकर फिर पाठ्य-पुस्तको में सर खपाती | इस तरह पढाई, काम और तैराकी का अभ्यास सब साथ साथ चलता रहा | लक्ष्य स्थिर कर लिया फिर आराम कैसा ? छुट्टी के दिनों में भी काम करके किसी तरह ध्येय पूर्ति के लिए आर्थिक साधन जुटाने में लगी रहती |

आरती (Arati Saha) की लगन को देखकर रेलवे के जनरल मेनेजर दुसरे प्धाधिकरियो तथा कार्यालय के साथियों ने भी उसकी पुरी सहायता की | प्रतिदिन के नियमित अभ्यास के बाद उसके लिए आठ घंटे निरंतर तैरने की व्यवस्था हो गयी | सफल होने पर कलकत्ता विश्वविद्यालय ने भारत सरकार से इंग्लिश चैनल तैराकी प्रतियोगिता के लिए उस नाम की सिफारिश कर सके | फिर एक दिन वह अपने स्वप्न को साकार करने उमंग भरे मन से अपने मेनेजर के साथ विमान द्वारा लन्दन और फिर वहा से डोवर पहुच गयी | वहा कई दिनों तक घंटो तक लगातार पानी में तैरकर इंग्लिश चैनल को चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी गयी |

अपनी तैराकी की विजय यात्रा के दौरान कुमारी साहा दो बार केवल इसलिए नही घबरा उठी थी कि कष्ट या कठिनाईया थी | इसके पूर्व किनारे के पास आकर वह एक बार असफल हो चुकी थी इसलिए जब भी वैसा संकट आ घिरता , उनकी हिम्मत टूटने लगती थी | पर करो या मरो के मन्त्र ने पिछली असफलता का रंज धो दिया | असफलता की यह घटना 27 अगस्त 1959 को घटी थी |  आरती  साहा (Arati Saha) को अपनी सफलता के अद्भुद कारनामे के लिए भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाजा था |

आरती साहा (Arati Saha) का विवाह उनके मेनेजर अरुण गुप्ता से हुआ था | पहले उन्होंने कोर्ट मैरिज की थी बाद में धूमधाम से सामजिक तरीके से विवाह हुआ | उनकी एक पुत्री अर्चना , बंगाल नागपुर रेलवे में कर्मचारी है | 04 अगस्त 1994 में पीलिया होने के कारण उन्हें कोलकाता के अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन 19 दिनों तक जिन्दगी की जंग लड़ने के बाद 23 अगस्त 1994 को उनकी साँसे थम गयी | इस तरह 53 वर्ष की उम्र में आरती साहा (Arati Saha )के देहांत हो गया |

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