अत्तिला हुण की जीवनी Attila the Hun Biography in Hindi

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अत्तिला हुण की जीवनी Attila the Hun Biography in Hindi
अत्तिला हुण की जीवनी Attila the Hun Biography in Hindi

अत्तिला हुण सन 434 ईस्वी से अपनी मृत्यु तक हूनो का राजा था | वह हुण साम्राज्य का नेता था जो जर्मनी से यूराल नदी और दैनयुस नदी से बाल्टिक सागर तक फैला हुआ था | अपने राज्यकाल में वह पश्चिमी और पूर्वी रोमन साम्राज्य का सबसे भयानक शत्रु था | उसे बाद के इतिहासकारों ने “भगवान का कोड़ा” कहकर संबोधित किया | उसने दो बार बाल्कन क्षेत्र पर हमला किया | गोल (आधुनिक फ्रास) में वह ओर्ल्यो तक पहुच गया पर उसने इस्ताम्बुल या रोम पर कभी आक्रमण नही किया | लगभग सारे पश्चिमी यूरोप में उसे क्रूरता और लोभ के परम उदाहरण के रूप में याद किया जाता है लेकिन कुछ एतेहासिक विवरणों और कहानियों में अत्तिला को महान सम्राट के रूप में दर्शाया गया है | नॉर्स गाथाओं में अत्तिला की प्रमुख भूमिका है |

अत्तिला का जन्म 406 ईस्वी में पन्नोनिया में हुआ था | उसके पिता का नाम मूंदजुक था | उसके जन्म के कुछ घंटे पहले ही कैस्पियन सागर के उत्तर-पूर्वी प्रदेशो में हुण डैन्यूस नदी की घाटी में आ बसे थे | अत्तिला के पिता का परिवार भी उन्ही हूणों में से एक था | चचा रूआस के मरने पर अपने भाई बलेग के साथ अत्तिला दैन्युस तटीय हूणों का संयुक्त राजा बना | रूआस का शासनकाल हूणों के लिए यूरोप में विशेष उत्कर्ष का काल था | उसने जर्मन एवं स्लाव जातियों पर आधिपत्य कर लिया था और उसका दबदबा कुछ ऐसा बढ़ा कि पूर्वी रोमन सम्राट उसे वार्षिक कर देने लगा |

चाचा के ऐश्वर्य का अत्तिला ने प्रसार किया और आठ वर्षो में वह कैस्पियन एवं बाल्टिक सागर के बीच के समूचे राज्यों , राइन नदी तक स्वामी बन गया | सन 450 के पश्चात अत्तिला पूर्वी साम्राज्य को छोडकर पश्चिमी साम्राज्य की ओर बढ़ा | तब पस्चिमी साम्राज्य का सम्राट वालेंतिनियन तृतीय था | सम्राट की बहन जुस्तग्राता होनोरिया ने अपने भाई के विरुद्ध सहायता के अनुरोध करते हुए अत्तिला को अपनी अंगूठी भेजी थी |

इसे विवाह का प्रस्ताव मान हुनराज ने सम्राट से बहन के दहेज़ में आधा राज्य माँगा और अपनी सेना लिए वह गॉल को रौंदता , मेट्स को लुटता ल्वार नदी के तट पर बसे आर्लिया जा पहुचा पर रोमन सेना ने पश्चिमी गोथो और नगरवासियों की सहायता से हूणों को नगर का घेरा उठा लेने को मजबूर किया | फिर दो महीने बाद जून 451 ई. में इतिहास की सबसे भयंकर खूनी लड़ाइयो में से एक लडी गयी जब दोनों सेनाये सेन नदी के तट पर Troy के निकट परस्पर मिली |

भीषण युद्ध हुआ और जीवन में बस एक बार हारकर अत्तिला को भागना पड़ा | पर अत्तिला चुप बैठनेवाला आदमी नही था | अगले साल सेना एकत्रित कर स्वयं इटली पर उसने धावा बोल दिया और देखते-देखते उसका उत्तरी लोबार्दी का प्रान्त उजाड़ा डाला | उखड़े एवं भागे हुए लोगो ने आदियातिक सागर पहुच वहा से प्रसिद्ध नगर वेनिस की नींव डाली | सम्राट वालेंटीनियन ने भागकर रावेना में शरण ली | पर पॉप लियो प्रथम ने रोम की रक्षा के लिए मिचियो नदी के किनारे पडाव डाले अत्तिला से प्रार्थना की | कुछ पॉप के अनुनय से , कुछ हूणों के बीच प्लेग फुट पड़ने से अत्तिला ने इटली छोड़ देना स्वीकार किया |

इटली से लौटकर उसने बगर्दो ली राजकुमारी इल्दिको से ब्याह किया , पर अपनी सुहागरात को ही वह उच्च रक्तचाप के कारण मस्तिस्क की नली फट जाने से मर गया | अत्तिला ने पश्चिमी रोमन साम्राज्य की रीढ़ तोड़ दी | उसने ओर हूणों के नाम से यूरोपीय जनता थर-थर काँपने लगी | हंगरी में बसकर तो उन्होंने उस देश को पाना नाम दिया ही ,शासन नार्वे और स्वीडन तक चला | चीन के उत्तरी-पूर्वी प्रांत कासु ने उनका निकास हुआ था और वहां से यूरोप तक हूणों ने पाना खूनी आधिपत्य कायम किया |

अत्तिला के मरने के बाद हूंण साम्राज्य बिखरकर रह गया | अत्तिला की सबसे बड़ी उपलब्धि यही थी कि उसने खानाबदोश जातियों को पेशवर सेना के रूप में तब्दील कर दिया था और रोमन साम्राज्य की चूले हिलाकर रख दी थी | इटली पर किये गये अत्तिला के हमले से इतिहास में एक ओर परिवर्तन आया था | जब रोम का सम्राट भाग खड़ा हुआ था तब पॉप लियो ने अत्तिला से मुलाकात की | पॉप ने क्या कहा यह अधिक प्रासंगिक बात नही है | अहम बात यह है कि पहली बार धर्मगुरु ने जनता का साथ देने का फैसला किया | इस घटना के बाद आम जनता का भरोसा चर्च पर बढ़ गया और राजनेताओं के प्रति पहले जैसी आस्था नही रह गयी | इसके साथ ही मध्ययुग की भी शुरुवात हुयी |

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