Helen Keller Biography in Hindi | हेलन केलर की जीवनी

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Helen Keller Biography in Hindi
Helen Keller Biography in Hindi

हेलन केलर (Helen Keller) का जन्म 27 जून 1880 को अलबामा में हुआ | उनके पिता शहर के समाचार-पत्र के सफल सम्पादक थे और माँ एक गृहिणी थी | हेलन (Helen Keller) अभी छोटी ही थी कि उन्हें तेज बुखार से जकड़ लिया | अधिकतर मामलो में ऐसे रोगी की मृत्यु हो जाती थी लेकिन हेलन बच गयी | बाद में पता चला कि उनकी देखने और सुनने की शक्ति जा चुकी थी | माता-पिता विकल हो उठे किन्तु वे जानते थे कि उनकी पुत्री सब संघर्षों का सामना करने की ताकत रखती है |

हेलन (Helen Keller) सूंघने एवं छूने की शक्ति का प्रयोग करने लगी | वह माँ की स्कर्ट थाम कर पीछे-पीछे चलती | जल्द ही वह लोगो के चेहरों या कपड़ो के स्पर्श से उन्हें पहचानने लगी | पिता के कई मित्रो को वह तम्बाकू की गंध से पहचान जाती | सात साल की आयु में उसने परिवार के बीच सांकेतिक भाषा इस्तेमाल करनी शुरू कर दी किन्तु यह औपचारिक संकेत भाषा नही थी | उसे कुछ खाने या पीने को चाहिए होता तो वह हाथ के इशारे से समझा देती | इसी उम्र से उसे अपनी कमी का एहसास हुआ | अपनी बात पुरी नही होने पर वह हल्ला मचा देती |

माता-पिता ने उसके लिए शिक्षक नियुक्त करने की सोची | एनी शिक्षक भी नेत्रहीन थी | वह जान गयी कि स्नप्रेष्ण के अभाव में ही हेलन ऐसा व्यवहार करती है | हेलन को सिखाने के लिए एनी ने हाथ पर पानी का संकेत बनाया , फिर उसका हाथ पानी के नीचे ले गयी | इस तरह उसने हेलर को पुरे वाक्यों में बात करने योग्य बना दिया | एनी ने सुझाव दिया कि हेलन (Helen Keller) को नेत्रहीनो के पार्किन इंस्टिट्यूट में भेजा जाए | पहले तो पिता को यह फिजूलखर्ची लगी किन्तु फिर वे मान गये |

हेलन (Helen Keller) ने पुरे छ: साल तक वहा ब्रेल सीखी | अब वह एक बुद्धिमती युवती थी जिसकी महत्वकान्शाये असीम थी | न्यूयार्क के राईट-हमसन स्कूल फॉर डीप में हेलन ने संकेत भाषा सीखी और फिर 1904 में रेडक्लिफ कॉलेज से स्नातक की उपाधि ली | फिर हेलन ने एक पुस्तक लिखी “The Story of My Life” पुस्तक इतनी चर्चित रही कि उन्होंने उसकी आय से एक घर खरीदा | वे एक धार्मिक युवती थी उन्होंने महिलाओं के समान अधिकारों के लिए भी आवाज उठाई | वे पुरे देश का भ्रमण करके लोगो को अपनी कहानी बताती ताकि वे भी दुखो से लड़ने की प्रेरणा पा सके |1968 में उनका निधन हो गया किन्तु आज भी वे कितने लोगो की प्रेरणा स्त्रोत है | उनकी मृत्यु के बाद उनके जीवन पर कई नाटक तथा फिल्मे बनाई गयी है |

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