पूर्व राष्ट्रपति आर.वेंकटरमन की जीवनी | R. Venkataraman Biography in Hindi

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पूर्व राष्ट्रपति आर.वेंकटरमन की जीवनी | R. Venkataraman Biography in Hindi
पूर्व राष्ट्रपति आर.वेंकटरमन की जीवनी | R. Venkataraman Biography in Hindi

भारत के प्रजातंत्र शासन में राष्ट्रपति का पद सबसे अधिक महत्वपूर्ण है | राष्ट्रपति संसद को भंग कर सकता है | देश की सुरक्षा के लिए कठोर से कठोर कदम उठा सकता है | पूर्व राष्ट्रपति आर.वेंकटरमन (R. Venkataraman) का जन्म 04 दिसम्बर 1910 को तमिलनाडू राज्य के तंजौर जिले के राजामादम नामक ग्राम में हुआ था | इनके पिता का नाम श्री रामास्वामी था | आर.वेंकटरमन (R. Venkataraman) उच्चकोटि के वकील थे |

प्रारम्भिक शिक्षा

वेंकटरमन (R. Venkataraman)बड़े प्रतिभाशाली छात्र थे | उन्होंने 23 वर्ष की आयु में ही मद्रास विश्वविद्यालय से M.A. तथा L.L.B. की परीक्षाये पास कर ली | उनकी पत्नी का नाम जानकी है जो एक धार्मिक स्वभाव की महिला है | पति सेवा ही उनके जीवन का सर्वोत्तम लक्ष्य था | आर.वेंकटरमन की तीन पुत्रिया है |उनके पिता श्री के.रामास्वामी अय्यर राष्ट्रभक्त थे | पिता का प्रभाव उन पर बचपन से ही पड़ा था |

वकील के रूप में 

आर.वेंकटरमन (R. Venkataraman) सफल वकील थे | उनकी वकालत इमानदारी की वकालत थी | इस पेशे में रहकर उन्होंने धन और यश खूब प्राप्त किया | वो अपनी योग्यता और परिश्रमशीलता के कारण वकील संघ के सचिव चुने गये | किसान-मजदूरों के प्रति उनकी विशेष सहानुभूति थी | किसान-मजदूरों की सेवा में लगातार लगे रहने के कारण वेंकटरमन को उनकी यूनियनो ने नेता चुन लिया |

राजनीतिक जीवन 

कांग्रेस नेता कामराज वेंकटरमन के राजनितिक गुरु थे | उन्ही की प्रेरणा से उन्होंने राजनीती में सक्रिय भाग लेना आरम्भ कर दिया | सन 1942 को “करो या मरो” आन्दोलन में उन्होंने जेल यात्रा भी की | सन 1957 से लेकर 1967 तक वेंकटरमन तमिलनाडू राज्य के मंत्रीमंडल में मंत्री भी रहे | मंत्रीमंडल में अनेक विभागों के वो मंत्री भी रहे | सन 1952 , 1957 और 1980 में वेंकटरमन लोकसभा के सदस्य चुने गये | अपनी योग्यता के कारण सन 1967 में योजना आयोग के सदस्य चुने गये | सन 1980 में वेंकटरमन वित्तमंत्री और सन 1982 में रक्षामंत्री बने |

24 अगस्त 1984 को उन्हें उपराष्ट्रपति के रूप में चुना गया | इस पद पर रहकर उन्होंने अपने कार्य का निर्वाह बड़ी योग्यता से किया | 25 जुलाई को वेंकटरमन (R. Venkataraman) ने राष्ट्रपति पद की शपथ लेकर इस पद को सुशोभित किया | उन्होंने अपने गरिमामय पद का सदा ध्यान रखा | वो एक योग्य राष्ट्रपति सिद्ध हुए | राजनीति में सक्रिय भाग लेने पर भी उन्होंने धार्मिक कार्यो में बाधा नही आने दी | शंकराचार्य ने उनकी धार्मिक रूचि के प्रशंसा की थी | राजनीती के क्षेत्र में श्री सत्यमूर्ति का आशीर्वाद उन्हें सदैव मिलता रहा |

जीवन के अंतिम दिन

12 जनवरी 2009 को उन्हें Urosepsis नामक बीमारी के चलते आर्मी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया | 20 जनवरी को उनकी हालत Low BP की वजह से नाजुक होने लगी थी | इस तरह बीमारियों से लड़ते हुए 27 जनवरी 2009 को Multiple Organ Failure की वजह से नई दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल में देहांत हो गया | गणतन्त्र दिवस के दुसरे दिन उनका देहांत होने से उस दिन होने वाले आयोजनों को पूर्व राष्ट्रपति की याद में रद्द कर दिया गया  | राजघाट के निकट एकतास्थल पर उनका विधि-विधान से दाह संस्कार किया गया | ऐसे राष्ट्रपति के रहने से देश की उन्नति होती है |

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