पूर्व राष्ट्रपति वी.वी.गिरी की जीवनी | V.V.Giri Biography in Hindi

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पूर्व राष्ट्रपति वी.वी.गिरी की जीवनी | V.V.Giri Biography in Hindi
पूर्व राष्ट्रपति वी.वी.गिरी की जीवनी | V.V.Giri Biography in Hindi

वी.वी.गिरी (V.V.Giri) का जन्म 10 अगस्त 1894 को बहरामपुर .उडीसा में हुआ था | उनके पिता जोगैया पुन्तलू जाने-माने वकील थे | वे बहरामपुर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष भी रहे | गिरी ने आरम्भिक शिक्षा बहरामपुर उच्च विद्यालय और खालीकोट से प्राप्त की | इसके बाद मद्रास सीनियर कैम्ब्रिज परीक्षा पास की | पिता की इच्छा के विरुद्ध वे इंग्लैंड के बजाय आयरलैंड चले गये जो उस समय इंग्लैंड के कब्जे में था |

वी.वी.गिरी (V.V.Giri) ने दक्षिण अफ्रीका का आतंक नामक पुस्तक लिखी लेकिन वह भारत में वितरित होने से पहले ही अंग्रेजो के हाथ लग गयी | महात्मा गांधी से उनकी मुलाक़ात लन्दन में 1914 में हुयी | उन पर गांधीजी का गहरा प्रभाव पड़ा | गांधीजी के विचारो ने उन्हें अहिंसा का सरल किन्तु दृढ़ मार्ग दिखाया | गांधीजी ने भी उनके कार्यो को सराहा और उन्हें अनेक कार्य सौंपे | गिरी गरम दल के थे | वे कभी श्रमिक नही रहे किन्तु श्रमिको की समस्याओं को अच्छी तरह समझते थे |

गिरी (V.V.Giri) को अनेक उच्च पदों के लिए भी प्रस्ताव मिले | उन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय में वकालत शुरू की | इसी बीच उनका सम्पर्क अनेक बड़े नेताओं एवं वकीलों से हुआ | इनमे वरदाचारी , श्रीनिवास आयंगर , सी.आर.दास , लार्ड सिन्हा एवं टी.प्रकाशम प्रमुख थे | असहयोग आन्दोलन में उन्होंने गांधीजी क साथ दिया | उन्हें गिरफ्तार कर अमरावती जेल भेज दिया गया | राजनीतिक बन्दियो के साथ चोरो और डकैतों जैसा व्यवहार होता था | गिरी ने इसका विरोध किया | उन्होंने नशेबंदी आंदोलनों में भी बढ़ चढकर भाग लिया | उनका विवाह 23 साल आयु में सरस्वती बाई से हुआ |

मजदूर युनियन से जुड़ाव

वी.वी.गिरी (V.V.Giri) ने नागपुर एवं बंगाल रेलवे में मजदूर यूनियनो का गठन किया जो अपने विशाल रूप में अखिल भारतीय कर्मचारी संघ कहलाया | सरकार ने रेलवे मजदूरों की छंटनी की | गिरी इस अन्याय को कैसे सहन कर सकते थे | पहले तो उन्होंने सरकार को विन्रमता से समझाया लेकिन कोई नतीजा नही निकला तो हडताल घोषित कर दी | अंतत: निकाले गये कर्मचारियों को वापस लेना पड़ा | इस घटना ने गिरी को चर्चित हस्ती बना दिया |

राजनीतिक जीवन

1916 में गिरी (V.V.Giri) कांग्रेस के सदस्य बने और एनी बीसेंट के स्वराज आन्दोलन से जुड़े | 1937 में गिरी मद्रास विधानसभा के सदस्य चुने गये और कैबिनेट मंत्री बने | देश की आजादी के बाद उन्हें श्रीलंका में भारतीय उच्चायुक्त बनाया गया | 1952 में लोकसभा चुनाव जीतने पर उन्हें श्रम मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गयी लेकिन दो वर्ष बाद ही कैबिनेट में श्रमिको के मसले पर मतभेद को लेकर उन्होंने मंत्री पद से त्याग पत्र दे दिया |

वी.वी.गिरी (V.V.Giri) उत्तर प्रदेश , केरल और मैसूर के राज्यपाल भी बने | 1967 आम चुनावों के बाद वी-वी.गिरी को उपराष्ट्रपति बनाया गया | 1971 में उन्हें श्रमिक नेता के रूप में भारत रत्न से सम्मानित किया गया | 1969 में डा.जाकिर हुसैन के निधन के बाद उन्होंने देश के चौथे राष्ट्रपति का कार्यभार सम्भाला | राष्ट्रपति पद के लिए उनका मुकाबला नीलम संजीव रेड्डी से हुआ जिनको उन्होंने बहुत कम अंतर से हराया | 24 जून 1980 को वी.वी.गिरी का निधन हो गया |

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