Verghese Kurien Biography in Hindi | वर्गीज कुरियन की जीवनी

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Verghese Kurien Biography in Hindi
Verghese Kurien Biography in Hindi

श्वेतक्रान्ति के जनक वर्गीज कुरियन (Verghese Kurien) का जन्म एक साइरियन इसाई परिवार में कालीकट में हुआ जिसे आजकल कोझीकोड कहा जाता है | उनके पिता केरल के कोचीन नामक स्थान में सिविल सर्जन थे | 1940 में मद्रास के “लोयोला कॉलेज” से भौतिकशास्त्र में स्नातक की डिग्री प्राप्त की | मद्रास विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की | “टाटा टेक्नीकल इंस्टीट्यूट” जमशेदपुर से 1946 में एक ओर डिग्री प्राप्त कर वे भारत सरकार की छात्रवृति पर अमेरिका गये तथा वहां 1948 में मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ़ साइंस की डिग्री distinction के साथ उत्तीर्ण की |

पढाई समाप्त कर जब वे लौटे तो भारतीय सरकार के द्वारा गुजरात के खेड़ा जिले में स्थित आनन्द में उन्हें नियुक्त किया गया | प्रारम्भ में उन्होंने बेमन से यह नौकरी की | बाद में मित्र श्री त्रिभुवन दास पटेल की सलाह से वे वही बने रहे | खेड़ा के किसानो को एकत्रित कर Cooperative Union बनाई जिसकी मूल अवधारणा अद्भुद पथ-प्रदर्शिका थी | इसके अंतर्गत दूध एकत्रित कर उसे संसाधित कर बेचे जाने की व्यवस्था की |

त्रिभुवन दास के इमानदार प्रयासों से वर्गीज को प्रेरणा मिली तथा वे मिलकर इस चुनौतीपूर्ण कार्य में सफलता प्राप्त कर सके | उन्ही दिनों उनके साथी एच.एम.डलया ने भैस के दूध से स्कीम दूध पाउडर तथा condescend Milk बनाने की प्रक्रिया विकसित की | यूरोप में गाय के दूध की प्रचुरता रहती है अत: नेस्ले जैसी कम्पनिया दूध पाउडर उसी से बनाती है | भारत में अमूल कम्पनी भैस के दूध का प्रयोग कर Nestle से प्रतियोगिता में सामने आयी |

पंडित जवाहरलाल नेहरु ने इसके लिए वर्गीज की पीठ थपथपाई तथा लाल बहादुर शास्त्री ने National Dairy Development Board (NDDB) गठित किया तथा राष्ट्रीय स्तर पर वर्गीज के कार्य को बढाने के लिए उन्हें उसका अध्यक्ष भी बनाया | इसी कार्य को आगे विकसित करते हुए वर्गीज ने 1979 में Institute of Rural Management Anand (IRMA) स्थापित की तथा देशभर में सबको दूध मिले यह कर दिखाया |

विलक्ष्ण तथ्य यह भी है वर्गीज (Verghese Kurien) ने कभी दूध नही पीया | विकसित भारत फाउंडेशन आदि संस्थाओं में भी उन्होंने सहयोग दिया | अशोक फाउंडेशन ने उन्हें वर्तमान काल का सामाजिक अध्यववासी कहा | वर्गीज और उनके सहयोगियों की सहायता से मात्र दो दशको में भारत दूध तथा उससे बने पदार्थो के निर्यातक देश के रूप में सामने आया | वर्गीज का विवाह मौली से हुआ | उनकी बेटी निर्मला और पौत्र सिद्धार्थ है | 90 वर्ष की उम्र में 9 सितम्बर 2012 को उनका निधन हुआ |

सहकारी दुग्ध आन्दोलन पर आधारित फिल्म मंथन का निर्माण जब श्याम बेनेगल कर रहे थे तब उसके लिए धन जुटाने का कार्य भी वर्गीज की प्रेरणा से बिल्कुल अनोखे तरीके से हुआ था | आधे लाख के करीब किसान सदस्यों ने फिल्म बनाने के मात्र दो रूपये प्रतीकात्मक राशि दी | फिल्म रिलीज होने पर वे सभी किसान अपनी उस फिल्म को देखने आये और उसे बॉक्स ऑफिस पर सफल बनाया | गुजरात में 1976 में जब उसे दिखाया तो दर्शको ने अनायास उससे जुड़ाव महसूस किया फिर तो वर्गीज ने देश के अन्य हिस्सों में फिल्म के साथ भ्रमण किया तथा जगह जगह सरकारी संस्थाए बनाने की प्रेरणा दी | अमूल मक्खन , अमूल घी , अमूल क्रीम , अमूल आइसक्रीम जैसे खाध्य पदार्थ उन्ही की प्रेरणा से सामने आये और लोकप्रिय हुए |

उपलब्धिया

  • वर्गीज कुरियन श्वेतक्रांति के जनक को दुनिया भर के विश्वविद्यालयो तथा संस्थाओ की ओर से दर्जन से अधिक मानद डिग्रीया मिली |
  • भारत सरकार ने 1965 में पद्मश्री , 1966 में पद्मभूषण तथा 1999 में पद्मविभूषण से सममानित किया |
  • उन्होंने रमन मैग्सेसे अवार्ड 1963 में प्राप्त किया |
  • वर्ल्ड डेयरी “एक्सपो ने इंटरनेशनल पर्सन ऑफ़ द इयर अवार्ड ” दिया |
  • 1986 में भारत सरकार द्वारा “कृषिरत्न अवार्ड” मिला |
  • 1989 में वर्ल्ड फ़ूड प्राइज की और से वर्ल्ड फ़ूड प्राइज प्राप्त किया |
  • 1986 में कार्नेगी फाउंडेशन नीदरलैंड की ओर से वाटेलर पीस प्राइज उन्हें मिला |
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