Vladimir Lenin Biography in Hindi | व्लादिमीर लेनिन की जीवनी

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Vladimir Lenin Biography in Hindi
Vladimir Lenin Biography in Hindi

व्लादिमीर लेनिन (Vladimir Lenin) का जन्म 10 अप्रैल 1870 में हुआ था | रूस के भावी जीवन पर इनका गहरा प्रभाव रहा | उनके पिता एक स्कूल इंस्पेक्टर के पुत्र थे और माता एक जमींदार डॉक्टर की पुत्री थी | व्लादिमीर (Vladimir Lenin) ने स्कूली शिक्षा के दौरान अपनी शैक्षिक प्रतिभा का परिचय दिया | उन्हें गोएथे एवं तुर्गनव का साहित्य पढना बहुत भाता था | युवा लेनिन के जीवन में दो दुःखदायी घटनाए घटी | 1886 में उनके पिता एवं भाई की मृत्यु हो गयी | उनके भाई अलेक्सेंडर को जार एलेग्जेंडर की हत्या का षड्यंत्र रचने के आरोप में फाँसी की सजा सुनाई गयी |

लेनिन (Vladimir Lenin) ने धर्म और राजनितिक तन्त्र को त्याग दिया | 1981 में उन्होंने कानून की परीक्षा पास की | 1893 में सेंट पीट्सबर्ग आकर कानून की प्रैक्टिस करने लगे | साथ ही उन्होंने भूमिगत मार्क्सवादी आन्दोलन भी शुरू किया | उन्होंने सदस्यों को छ: सदस्यीय सैल में बाँट दिया | इस माध्यम से औद्योगिक दशाओं की जाँच पड़ताल की गये , आंकडें जमा कर पत्र बाँटे गये | इन्ही दलों के माध्यम से उनकी भेंट भावी पत्नी नादेझरा से हुयी | 1898 में उन्होंने विवाह कर लिया |

लेनिन (Vladimir Lenin) 1895 में स्विट्जरलैंड गये और सामाजिक प्रजातांत्रिक सोच वाले लोगो से मिले | वे लौटे तो वे अपने साथ गैरकानूनी पम्पलेट लाये थे वे एक क्रांतिकारी पत्र आरम्भ करना चाहते थे | प्रकाशन की पूर्व संध्या पर नेतागण बंदी बना लिए गये | पन्द्रह महीने जेल में काटने के बाद उन्हें साइबेरिया में निर्वासन दे दिया गया | 1900 में निर्वासन समाप्त होने पर वे स्विटजरलैंड चले गये तथा वही अपना पत्र इस्करा (स्पार्क) प्रकाशित किया |

लेनिन (Vladimir Lenin) ने 1905 के सेंट पीट्सबर्ग के कत्लेआम में हुयी हिंसा पर आवाज उठाई | रूस में काफी उथल-पुथल मची थी | लेनिन दो साल के लिए रूस लौटे लेकिन जार ने लोगो को छुट दे-दे शांत कर दिया था इसलिए क्रान्ति नही हो सकी | लेनिन पुन: विदेश चले गये | 1917 में रूस में क्रान्ति हुयी | उस वर्ष दो क्रान्तिया हुयी | मार्च में सेंट पीट्सबर्ग के स्टील कर्मचारी हड़ताल पर चले गये | इससे हजारो लोग सड़को पर आ गये | जार की सत्ता का अंत हुआ तथा ड्यूमा ने सत्ता सम्भाली |

लेनिन (Vladimir Lenin) ने जर्मनों से समझौता किया यदि वे उन्हें सुरक्षित रूस ले जायेंगे तो वे सत्ता सभाल कर रूस को युद्ध से बाहर कर देंगे | अक्टूबर में लेनिन सत्ता में आ गये | 47 वर्षीय लेनिन (Vladimir Lenin) कम्युनिस्ट दल के अध्यक्ष बने | नई सरकार की समस्याओं का कोई अंत नही था | जर्मनी के साथ युद्ध तत्काल समाप्त हो गया | हालांकि रूस को युक्रेन खोना पड़ा लेकिन जल्द ही हाथ आ गया , जब जर्मनी की युद्ध में हार हुयी | जमीन को फिर से बाँटा गया | सामूहिक खेती भी की गयी | राज्य ने कारखानों , खदानों बैंक एवं अन्य सेवाओं का कार्यभार सम्भाल लिया | रशियन ओर्थोडॉक्स चर्च का राजकीय संरक्षण वंचित कर दिया गया |

1919 से 1921 की प्राकृतिक आपदाओं में करोड़ो लोग मारे गये | लेनिन ने नई आर्थिक योजना लागू की | हालांकि वे कभी इन्हें पूर्ण रूप से लागू नही कर सके | 1922 में उन्हें दो बार पक्षाघात हुआ | फिर उन्होंने तय किया कि शासन की कुछ नीतियों में सुधार लाना होगा | नौकरशाही की अक्षमता दूर करके , पूँजीवादी देशो के साथ सह-अस्तित्व स्थापित करना होगा | 1923 में हुए पक्षाघात ने उन्हें अपाहिज बना दिया और बोलने की ताकत भी जाती रही | फिर वे पुरी तरह से स्वस्थ नही हो सके | 21 जनवरी 1924 को उनका निधन हो गया |

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